चित्तौड़गढ़ के बस्सी में रेलवे भूमि पर पेड़ों में लगी आग, भारी नुकसान
बस्सी कस्बे में दमकल सुविधा न होने से समय पर नहीं काबू पाई जा सकी आग, ग्रामीणों ने प्रशासन से की फायर ब्रिगेड की मांग।

चित्तौड़गढ़ के बस्सी कस्बे में रेलवे भूमि पर यूकिलिप्टिस के पेड़ों में लगी आग को बुझाते दमकलकर्मी और स्थानीय ग्रामीण।
कस्बे के सोनागर मार्ग स्थित रेलवे स्टेशन के पास रेलवे की भूमि पर उगे यूकिलिप्टिस (सफदा) के पेड़ों में शनिवार को भीषण आग लग गई, जिससे पूरे क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। आग की तेज लपटों को देखते ही राजमार्ग से गुजर रहे राहगीरों और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए तथा तत्काल उच्चाधिकारियों को सूचना दी गई।
सूचना मिलते ही पुलिस और रेलवे के अधिकारी मौके पर पहुंचे और चित्तौड़गढ़ मुख्यालय से दमकल को बुलाया गया। हालांकि दमकल समय पर नहीं पहुंच सकी, जिससे आग ने तेजी से फैलकर आसपास की सूखी झाड़ियों को भी अपनी चपेट में ले लिया। तेज गर्मी और तेज हवाओं के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया तथा धुएं का घना गुबार पूरे क्षेत्र में फैल गया।
स्थिति इतनी भयावह हो गई कि लोगों को मौके से हटकर रेलवे पटरियों की ओर भागना पड़ा। इसके बावजूद ग्रामीणों ने अपने स्तर पर पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन तब तक दर्जनों यूकिलिप्टिस के पेड़ जलकर पूरी तरह राख हो चुके थे। बताया गया कि इस स्थान पर पहले भी आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
इधर, स्थानीय लोगों ने बताया कि बस्सी, जो चित्तौड़गढ़ विधानसभा का सबसे बड़ा कस्बा है और जहां आसपास करीब 200 से अधिक गांव जुड़े हुए हैं, वहां अब तक फायर ब्रिगेड की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। आगजनी की घटनाओं पर नियंत्रण के लिए हर बार चित्तौड़गढ़ से दमकल बुलानी पड़ती है, जिससे तब तक आग काफी फैल जाती है। ग्रामीणों ने बस्सी मुख्यालय पर फायर ब्रिगेड व्यवस्था की मांग की है।
आग लगने के कारणों को लेकर यह जानकारी सामने आई है कि रेलवे स्टेशन के पास स्थित इस सुनसान क्षेत्र में सुबह-शाम नशेड़ी किस्म के लोग बैठते हैं और पेड़-पौधों के बीच धूम्रपान करते हैं। आशंका जताई जा रही है कि किसी व्यक्ति द्वारा बीड़ी या सिगरेट का उपयोग करने के दौरान आग भड़क गई होगी। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि रात के समय इस क्षेत्र में नशे के आदी लोग और अपराधी सक्रिय रहते हैं, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठते हैं। स्थानीय लोगों ने पुलिस गश्त बढ़ाने की भी मांग की है।
इस आगजनी में लाखों रुपये मूल्य के पेड़ जलकर नष्ट हो गए, जिससे पर्यावरणीय और आर्थिक दोनों स्तर पर बड़ा नुकसान हुआ है।

Pratahkal Bureau
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