राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में शहरी क्षेत्र से होकर प्रवाहित हो रही गंभीरी नदी से भटककर एक नन्हा मगरमच्छ (बेबी क्रोकोडाइल) रिहाइशी इलाके के खेतों में पहुंच गया, जहां वह एक मछली पकड़ने वाले जाल के टुकड़े में फंसकर असहाय हो गया। यह घटना शहर के मध्य स्थित भोईखेड़ा क्षेत्र की है, जहां नदी किनारे खेती करने वाले एक जागरूक किसान की दृष्टि इस फंसे हुए वन्यजीव पर पड़ी। किसान ने त्वरित सूझबूझ का परिचय देते हुए नन्हे मगरमच्छ को जाल सहित सुरक्षित बाहर निकाला और उसे संभावित खतरों से बचाने के लिए पास ही स्थित पानी की एक कुंडी (टंकी) में रख दिया, जिसके पश्चात तत्काल वन विभाग को इस घटना की सूचना दी गई।

सूचना मिलते ही वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य राहुल वानखेड़े, रामकुमार साहू और मुबारिक खान तुरंत मौके पर पहुंचे। इस दौरान वन विभाग की टीम भी घटनास्थल पर तैनात रही। वन्यजीव प्रेमी मनीष तिवारी ने बताया कि शहर के बीचों-बीच से गंभीरी और बेडच नदियां गुजरती हैं, जिनके किनारों पर शहरी सीमाओं के भीतर भी कृषि कार्य होता है, जिसके कारण अक्सर वन्यजीव भटककर खेतों तक पहुंच जाते हैं।

वन विभाग और वन्यजीव प्रेमियों की संयुक्त टीम ने पूरी सावधानी और निर्धारित सुरक्षा मानकों का अक्षरशः पालन करते हुए रेस्क्यू ऑपरेशन का संचालन किया। टीम ने नन्हे मगरमच्छ को सावधानीपूर्वक जाल से सफलतापूर्वक मुक्त कराया। स्वास्थ्य परीक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित करने के पश्चात, वन विभाग की सीधी निगरानी में इस बेबी क्रोकोडाइल को पुनः उसके प्राकृतिक आवास गंभीरी नदी में सुरक्षित छोड़ दिया गया। इस सफल रेस्क्यू ने न केवल एक बेजुबान वन्यजीव की जान बचाई, बल्कि क्षेत्र के पारिस्थितिक संतुलन को बनाए रखने की दिशा में स्थानीय नागरिकों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय का उदाहरण भी प्रस्तुत किया।

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