आसमान छूती महंगाई और ईंधन की बेलगाम कीमतों की चौतरफा मार से त्रस्त ऑटो चालकों के सब्र का बांध अब टूट गया है। चित्तौड़गढ़ शहर के हजारों ऑटो चालकों ने अपने वजूद और परिवार के भरण-पोषण के संकट को देखते हुए अब किराए में बढ़ोतरी के लिए हुंकार भर दी है। मंगलवार को ऑटो रिक्शा चालक यूनियन के बैनर तले एकजुट हुए दर्जनों चालकों ने जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर जिला कलेक्टर को एक औपचारिक ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से चालकों ने प्रशासन से प्रति सवारी किराए में 5 रुपये की अविलंब वृद्धि करने की अनुमति देने का पुरजोर आग्रह किया है।

यूनियन द्वारा जिला कलेक्टर को सौंपे गए इस महत्वपूर्ण ज्ञापन में वर्तमान वैश्विक और घरेलू परिस्थितियों का गहराई से उल्लेख किया गया है। चालकों ने बताया कि वैश्विक स्तर पर जारी युद्ध और अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के कारण देश के भीतर तेल की कीमतों में अप्रत्याशित और भारी उछाल आया है। ईंधन की इस आग ने दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुओं और आम जरूरतों को भी अत्यधिक महंगा कर दिया है। यूनियन के पदाधिकारियों ने जमीनी हकीकत बयां करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ शहर में वर्तमान में लगभग 3 से 4 हजार ऑटो चालक सक्रिय हैं। ये सभी चालक दिन-रात सड़कों पर ऑटो दौड़ाकर अपने और अपने आश्रित परिवारों का आजीविकोपार्जन कर रहे हैं। लेकिन वर्तमान दौर की इस कमरतोड़ महंगाई ने उनके सामने परिवार का सुचारू रूप से गुजारा करने का एक बड़ा और गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।

प्रशासनिक और ऐतिहासिक संदर्भों का हवाला देते हुए ज्ञापन में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया कि इससे पूर्व वर्ष 2019 में प्रशासन की पूर्ण सहमति से ऑटो किराए में कुछ आंशिक संशोधन किया गया था। उस समय प्रति व्यक्ति किराया दर को 10 रुपये से बढ़ाकर 20 रुपये निर्धारित किया गया था। लेकिन विडंबना यह है कि पिछले करीब 7 वर्षों की लंबी अवधि से इस किराए में कोई तार्किक बढ़ोतरी नहीं की गई है, जबकि इसी समयावधि में ईंधन के दाम और वाहनों के मेंटेनेंस का खर्च कई गुना तक बढ़ चुका है। ऐसे में वर्तमान में लागू 20 रुपये की किराया दर प्रत्येक ऑटो चालक के लिए बेहद कम, अव्यावहारिक और आर्थिक रूप से नुकसानदेह साबित हो रही है।

यूनियन ने चित्तौड़गढ़ के रणनीतिक और पर्यटन महत्व की ओर प्रशासन का ध्यानाकर्षण करते हुए कहा कि यह शहर एक विश्वप्रसिद्ध ऐतिहासिक व पर्यटक स्थल है, जिसका गौरवशाली किला यूनेस्को की वर्ल्ड हेरिटेज सूची में गरिमापूर्ण स्थान रखता है। इस ऐतिहासिक महत्व के कारण देश-विदेश से हर साल सैकड़ों-हजारों सैलानी और दर्शनार्थी यहाँ खिंचे चले आते हैं। इन बाहरी पर्यटकों को रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड से लेकर चित्तौड़गढ़ किले तथा शहर के अन्य सुदूर कोनों तक घुमाने-फिराने का मुख्य जिम्मा इन्हीं ऑटो चालकों के कंधों पर होता है। चालकों का तर्क है कि एक सुव्यवस्थित, पारदर्शी और न्यायसंगत किराया प्रणाली लागू होने से पर्यटकों को भी किसी प्रकार की परेशानी या असमंजस का सामना नहीं करना पड़ेगा और स्थानीय चालकों को भी बड़ी राहत मिल सकेगी।

तमाम परिस्थितियों पर विस्तृत विचार-विमर्श करने के बाद ऑटो रिक्शा चालक यूनियन ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लेते हुए प्रशासन से मांग की है कि वर्तमान में जो प्रति सवारी पूर्व निर्धारित किराया है, उसमें 5 रुपये की बढ़ोतरी को तत्काल स्वीकृति दी जाए। यानी अब प्रति सवारी किराया दर को 20 रुपये से बढ़ाकर 25 रुपये स्वीकृत किया जाए। इस महत्वपूर्ण ज्ञापन प्रदर्शन के दौरान कलेक्ट्रेट परिसर में अयूब अली, मुश्ताक अली, शंकर राव, रुस्तम खान, राकेश पटवा, सुल्तान, बंटी, मुकेश, प्रकाश दास, मुन्ना खान, रतन, शैतान सिंह, प्रकाश राव, अजीज खान, दुर्गेश और मुकेश जायसवाल सहित दर्जनों ऑटो चालक प्रमुख रूप से मौजूद रहे। इन सभी ने कलेक्ट्रेट परिसर में एकत्रित होकर प्रशासन से इस गंभीर समस्या पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए जल्द से जल्द राहत प्रदान करने की पुरजोर अपील की है।

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