चित्तौड़गढ़ में जून में मनाया जाएगा एंटी मलेरिया माह, अभियान शुरू
स्वास्थ्य विभाग ने 2030 तक मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को लेकर जिला स्तर पर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए और 16 जून से हैचरीज क्रियाशील पखवाड़ा शुरू होगा।

जिला प्रशासन चित्तौड़गढ़ के कार्यालय में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ताराचन्द गुप्ता और उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. पुनीत कुमार तिवारी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक के दौरान एंटी मलेरिया माह अभियान की तैयारियों की समीक्षा करते स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी।
जिले में मलेरिया उन्मूलन की दिशा में जन-जागरूकता, समय पर जांच और उपचार सुनिश्चित करने के लिए जून माह को ‘एंटी मलेरिया माह’ के रूप में मनाया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने इस संबंध में सभी खण्डों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं। अभियान के तहत जिलेभर में व्यापक स्तर पर जागरूकता, सर्विलांस और रोकथाम गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. ताराचन्द गुप्ता ने बताया कि केंद्र सरकार ने वर्ष 2030 तक देश को मलेरिया मुक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया है और राजस्थान इस दिशा में तेजी से कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि जून माह में चलने वाला यह विशेष अभियान आमजन को मच्छरजनित रोगों के प्रति जागरूक बनाने और समय पर उपचार सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
डॉ. गुप्ता ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय एवं राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण केन्द्र के निर्देशानुसार जून 2026 को ‘एंटी मलेरिया माह’ के रूप में मनाया जाएगा। अभियान का उद्देश्य केवल जागरूकता फैलाना नहीं बल्कि सघन मॉनिटरिंग, समय पर जांच और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करना भी है। ग्राम स्तर तक रैलियां, विद्यालयों में कार्यक्रम, प्रचार अभियान और जन-जागरूकता गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। प्रत्येक बुखार पीड़ित व्यक्ति की ब्लड स्लाइड और आरडीटी जांच कराने के लिए लोगों को प्रेरित किया जाएगा। इसके साथ ही मच्छरों के प्रजनन स्थलों को खत्म करने, साफ-सफाई बनाए रखने और विभिन्न विभागों के समन्वय से रोकथाम गतिविधियां संचालित की जाएंगी।
स्वास्थ्य विभाग ने विशेष रूप से जनजातीय क्षेत्रों, वन क्षेत्रों, सीमा क्षेत्रों, परियोजना क्षेत्रों तथा शहरी एवं पेरी-अरबन इलाकों में विशेष सर्विलांस अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण समितियों की बैठकों में आशा सहयोगिनी, एएनएम, सीएचओ, पंचायत प्रतिनिधियों और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।
उप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (स्वास्थ्य) डॉ. पुनीत कुमार तिवारी ने बताया कि दूरस्थ एवं दुर्गम क्षेत्रों में मलेरिया जांच किट, एंटी मलेरियल दवाइयों और एलएलआईएन की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। छात्रावासों, आश्रमों, जेलों, कार्यालयों और सुरक्षा बल शिविरों में भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होंगे।
उन्होंने बताया कि जिला स्तर से वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के माध्यम से जिले के बीसीएमओ, सीएचसी और पीएचसी को अभियान की गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है। 16 जून से 30 जून तक ‘हैचरीज क्रियाशील पखवाड़ा’ मनाया जाएगा, जिसके तहत पानी के गड्ढों में गम्बूशिया मछलियां छोड़ी जाएंगी ताकि मच्छरों के लार्वा को नियंत्रित किया जा सके। इसके अलावा प्रत्येक मलेरिया पॉजिटिव केस के आसपास 100 घरों में फीवर सर्वे, एंटी लार्वा गतिविधियां और आईईसी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। विभाग ने सभी खण्डों को अभियान की दैनिक और साप्ताहिक रिपोर्ट नियमित रूप से जिला स्तर पर भेजने के निर्देश भी जारी किए हैं।
मलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को लेकर शुरू किया जा रहा यह अभियान जिले में मच्छरजनित रोगों की रोकथाम, समय पर जांच और प्रभावी उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग की बड़ी पहल माना जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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