चित्तौड़गढ़: भदेसर भैरव मंदिर के पास कब्रिस्तान भूमि आवंटन पर भड़का आक्रोश, जनसैलाब ने घेरा कलेक्ट्रेट
चित्तौड़गढ़ के भदेसर में भेरूजी मंदिर के पास कब्रिस्तान भूमि आवंटन को लेकर बवाल। सांसद सी पी जोशी और विधायक चंद्रभान सिंह आक्या के नेतृत्व में ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर भूमि आवंटन निरस्त करने की मांग की। जानें क्या है पूरा विवाद और क्यों बंद रहा भदेसर कस्बा। सांप्रदायिक सौहार्द बनाए रखने हेतु संघर्ष समिति की बड़ी चेतावनी।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के ऐतिहासिक जिले चित्तौड़गढ़ के भदेसर उपखंड में आस्था और व्यवस्था के बीच उपजा विवाद अब एक बड़े जन आंदोलन का रूप ले चुका है। सदियों पुराने भदेसर भेरूजी मंदिर की पवित्रता और भविष्य की सुरक्षा को लेकर शनिवार को पूरा भदेसर कस्बा स्वतः स्फूर्त बंद रहा। व्यापारियों ने स्वेच्छा से अपने प्रतिष्ठानों के शटर गिराकर इस मांग को अपना पुरजोर समर्थन दिया कि मंदिर के समीप आवंटित की गई कब्रिस्तान की भूमि को तत्काल प्रभाव से निरस्त किया जाए। यह बंद केवल एक विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि प्रशासन के उस निर्णय के खिलाफ एक सामूहिक हुंकार थी, जिसे ग्रामीण जनभावनाओं के विपरीत और राजनीतिक दबाव में लिया गया फैसला मान रहे हैं।
भदेसर का यह प्राचीन भैरव मंदिर न केवल राजस्थान बल्कि पड़ोसी राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए भी अटूट आस्था का केंद्र है। विवाद की जड़ें साल 2010 में जाती हैं, जब तत्कालीन प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा मंदिर से मात्र 50 मीटर की दूरी पर 9 बीघा 13 बिस्वा भूमि तीन अलग-अलग टुकड़ों में कब्रिस्तान के लिए आवंटित कर दी गई थी। शनिवार को इसी आवंटन के विरोध में भदेसर भैरूजी मंदिर संघर्ष समिति के आह्वान पर हजारों की संख्या में ग्रामीण जिला मुख्यालय पहुंचे। कलेक्ट्रेट चौराहे पर ग्रामीणों ने एक विशाल मानव श्रृंखला बनाई, जिसने प्रशासन को जनशक्ति का परिचय दिया। इस प्रदर्शन में जनभावनाओं को आवाज देने के लिए सांसद सी पी जोशी, विधायक चंद्रभान सिंह आक्या और भाजपा जिलाध्यक्ष रतन गाडरी सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी भी कंधे से कंधा मिलाकर खड़े नजर आए।
जिला कलेक्टर को सौंपे गए औपचारिक ज्ञापन में संघर्ष समिति और जनप्रतिनिधियों ने बेहद गंभीर तर्क प्रस्तुत किए हैं। ज्ञापन में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में भैरव मंदिर का भव्य नव-निर्माण कार्य प्रगति पर है और आने वाले समय में यहाँ श्रद्धालुओं का आवागमन कई गुना बढ़ने वाला है। मंदिर के बिल्कुल समीप कब्रिस्तान होने के कारण भविष्य में सांप्रदायिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका जताई गई है। तर्क दिया गया है कि यदि मंदिर में कोई बड़ा धार्मिक उत्सव हो और उसी समय मुस्लिम समाज में किसी की मृत्यु हो जाए, तो रास्ते और भीड़ के प्रबंधन को लेकर गंभीर विवाद की स्थिति बन सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि यह भूमि आवंटन उस समय के राजस्व अभियान के दौरान बिना किसी जमीनी निरीक्षण के किया गया था, जबकि इस आवंटन को किसी अन्य उपयुक्त स्थान पर भी किया जा सकता था।
यह संघर्ष लंबे समय से चल रहा है, जिसके तहत पूर्व में भी उपखंड अधिकारी और मुख्यमंत्री तक को गुहार लगाई जा चुकी है। संघर्ष समिति के सदस्यों का मानना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस संवेदनशील मुद्दे का समाधान नहीं निकाला और भूमि आवंटन को निरस्त कर अन्यत्र स्थानांतरित नहीं किया, तो यह स्थिति शांति भंग होने का बड़ा कारण बन सकती है। फिलहाल, भदेसर के इस संपूर्ण बंद और जिला मुख्यालय पर हुए भारी प्रदर्शन ने प्रशासन को इस मामले पर पुनर्विचार करने के लिए विवश कर दिया है। अब क्षेत्र की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हैं कि क्या जनभावनाओं का सम्मान करते हुए इस विवादित आवंटन को रद्द किया जाएगा।

Pratahkal Bureau
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