चित्तौड़गढ़। इंसानियत और ईमानदारी की चमक आज भी सोने की आभा से कहीं अधिक कीमती है। चित्तौड़गढ़ के ऐतिहासिक दुर्ग क्षेत्र में घटी एक घटना ने इस बात को पुन: चरितार्थ कर दिया है, जहाँ एक स्थानीय निवासी की सतर्कता और पुलिस प्रशासन की तत्परता से एक महिला पर्यटक की बेशकीमती अमानत उन्हें सुरक्षित वापस मिल गई।

घटनाक्रम की शुरुआत लगभग 15 से 20 दिन पूर्व हुई थी, जब चित्तौड़गढ़ दुर्ग मार्ग पर स्थित रतन सिंह महल के समीप एक ऑटो अनियंत्रित होकर सड़क से नीचे उतर गया था। इस हादसे के दौरान ऑटो में सवार महिला पर्यटक गेंद कंवर के कान का सोने का टॉप्स वहीं कहीं गिर गया था। लगभग 40 से 50 हजार रुपये मूल्य का यह आभूषण झाड़ियों और मिट्टी के बीच कहीं खो गया था, जिसकी उम्मीद महिला शायद छोड़ चुकी थीं।

हालांकि, नियति को कुछ और ही मंजूर था। दुर्ग निवासी चेतन सालवी की नजर उस स्थान पर पड़ी जहाँ यह कीमती आभूषण गिरा हुआ था। अपनी ईमानदारी का परिचय देते हुए चेतन ने बिना देरी किए इसकी सूचना तुरंत पुलिस चौकी पर दी। सूचना मिलते ही चौकी प्रभारी हिम्मत सिंह और कांस्टेबल मनीष मौर्य सक्रिय हुए। उन्होंने मौके पर पहुँचकर साक्ष्य के रूप में सोने के आभूषण को अपने कब्जे में लिया और गहन जांच-पड़ताल के बाद संबंधित महिला पर्यटक गेंद कंवर से संपर्क साधा।

कानूनी औपचारिकताएं पूर्ण करने के पश्चात, गुरुवार को इस कहानी का सुखद पटाक्षेप हुआ। गेंद कंवर के पुत्र जगदीश सिंह, जो भीलवाड़ा के निवासी हैं, चित्तौड़गढ़ पहुँचे। पुलिस प्रशासन द्वारा आभूषण की पहचान सुनिश्चित कराई गई और पूरी पारदर्शिता के साथ उसे जगदीश सिंह के सुपुर्द कर दिया गया। यह घटना न केवल पुलिस की कार्यप्रणाली के प्रति जनता का विश्वास सुदृढ़ करती है, बल्कि यह भी संदेश देती है कि आज के भौतिकवादी युग में भी नैतिक मूल्य जीवित हैं। चित्तौड़गढ़ पुलिस और चेतन सालवी के इस समन्वित प्रयास की अब पूरे शहर में सराहना की जा रही है।

Pratahkal Newsroom

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