चित्तौड़गढ़। धर्मनगरी चित्तौड़गढ़ के रिठौला चौराहा स्थित भानफोर्ट रिसॉर्ट में महामंगलकारी अनुष्ठान एवं अक्षय तृतीया पारणा महोत्सव पूरी दिव्यता और हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ। यह आध्यात्मिक समागम श्रमण संघीय उप प्रवर्तिनी महासती मंजुल ज्योति म.सा. आदि ठाणा-5, अनुष्ठान आराधिका महासती डॉ. कुमुदलता म.सा., स्वर साम्राज्ञी डॉ. महाप्रज्ञा म.सा. आदि ठाणा-4, जैन सिद्धांताचार्य महासती प्रतिभा जी म.सा. आदि ठाणा-4 एवं मृदु स्वभावी शीतल म.सा. आदि ठाणा-2 के पावन सानिध्य में आयोजित किया गया। श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान और आदेश्वर पार्श्व सेवा ट्रस्ट के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस विशाल पारणा महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से पधारे 52 वर्षीतप तपस्वियों का पारणा मंत्रोच्चार के बीच संपन्न हुआ। इस पुनीत अवसर पर 108 नन्हे बच्चों को श्रेयांश कुमार बनने का दुर्लभ सौभाग्य प्राप्त हुआ, जिन्होंने तपस्वियों की सेवा कर धर्म प्रभावना में अपना योगदान दिया।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए साध्वी डॉ. कुमुदलता म.सा. ने अक्षय तृतीया पारणा के आध्यात्मिक महत्व और इसके गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्षीतप की कठिन साधना से आत्मा और शरीर में व्याप्त विकारों एवं दूषित विचारों का शमन होता है, यह साताकारी कार्य जीव को मोक्ष मार्ग की ओर अग्रसर करता है। उन्होंने समस्त तपस्वियों की उत्कृष्ट तपस्या की अनुमोदना करते हुए उनके मंगलमय जीवन की मंगलकामना की। इस अवसर पर साध्वी प्रेक्षा, साध्वी प्रतिभा तथा साध्वी पदम कीर्ति महाप्रज्ञा म.सा. ने भी अपने आशीर्वचनों से धर्मसभा को लाभान्वित किया। आयोजन के दौरान लाभार्थी सुशीला कंवर आक्या एवं विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने श्रमण संघ के नेतृत्व में साध्वी प्रतिभा म.सा. एवं संपूर्ण वर्षीतप आराधक साध्वी मंडल को आदर की चादर ओढ़ाकर वंदन किया।

समारोह में वर्षीतप के आराधकों का संगीतमय भव्य प्रवेश कराया गया, जिसके पश्चात उपस्थित अतिथियों ने तपस्वियों को इक्षु रस (गन्ने का रस) का पान करवाकर उनकी लंबी साधना का पारणा संपन्न करवाया। लाभार्थी सुशीला कंवर आक्या एवं विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने सभी तपस्वियों और देशभर से आए श्रावक-श्राविकाओं का आत्मीय स्वागत करते हुए पूज्य साध्वी डॉ. कुमुदलता म.सा. के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। श्री संघ की ओर से विधायक आक्या का मेवाड़ी पाग और नवकार उपरना ओढ़ाकर भव्य अभिनंदन किया गया। इस विराट धर्मसभा में श्री वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संस्थान अध्यक्ष किरण डांगी, महामंत्री राजेश सेठिया, अखिल भारतीय जैन दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आई.एम. सेठिया सहित अनिल ईनाणी, शैलेंद्र झंवर, नरेंद्र पोखरना, रवि विरानी, फतेह लाल भड़कत्या, प्रदीप बोहरा, कमलेश ढ़ेलावत, सुधीर जैन, स्मिता तरावत, मीना तरावत, अर्पित बोहरा, कुलदीप सिरोया, सरोज नाहर, रेखा जारोली, कनकमल दक, सुरेश मेहता, अशोक कोटेचा, अशोक जैन, डॉ सुशीला लड्ढा, डॉ दामोदर लड्ढा, राजाराम, नरेंद्र चोरड़िया, अशोक श्री श्रीमाल, उमेश जैन, संजय राठौड़, बलवंत बाघमार, राजकुमार वीरवाल, सांवरलाल बोरिया, पारस जैन, ज्ञानसागर जैन, सुनील बोहरा, अभय नाहर, पवन खटोड़, गौतम डांगी, रेखा नाहर, अंगूरबाला भड़कत्या, विमला सेठिया और आशा पोखरना सहित समाज के अनेक गणमान्य सदस्य साक्षी बने। यह महोत्सव चित्तौड़गढ़ की आध्यात्मिक चेतना और जैन धर्म की अटूट श्रद्धा के प्रतीक के रूप में दर्ज हुआ।

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