आकोला पंचायत समिति में कार्यरत मनरेगा के कनिष्ठ तकनीकी सहायक (जेटीए) राजीव सिंह के संदिग्ध परिस्थितियों में लापता होने का मामला मंगलवार को उस समय सामने आया जब उनकी तलाश में जुटी पुलिस और प्रशासन ने उन्हें कानड़खेड़ा क्षेत्र की पहाड़ी पर स्थित बीजासन माता मंदिर परिसर से सकुशल बरामद कर लिया। ताणा गांव में ग्रामीण सेवा शिविर में ड्यूटी के बाद सोमवार (13 जुलाई) रात से लापता राजीव सिंह बरामदगी के समय बिना कपड़ों के थे और बेहद डरे हुए दिखाई दिए।

मिली जानकारी के अनुसार, सवाई माधोपुर निवासी राजीव सिंह सोमवार को ताणा गांव में आयोजित ग्रामीण सेवा शिविर में ड्यूटी पर थे। शिविर समाप्त होने के बाद वे पास स्थित साण्डेश्वर महादेव मंदिर पहुंचे और काफी देर तक गुमसुम बैठे रहे। मंदिर के पुजारी ने जब उन्हें पानी पीने के लिए दिया तो वे अचानक पानी का लोटा छोड़कर नंगे पैर बाहर की ओर भाग गए। काफी देर तक वापस नहीं लौटने पर ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। मंदिर के बाहर उनकी मोटरसाइकिल खड़ी मिली, जबकि परिसर में बने कुएं के पास उनका मोबाइल फोन पूरी तरह टूटा हुआ मिला। उनके बैग से रतन बंजारा नामक व्यक्ति के दस्तावेज भी मिले, जिससे मामला और रहस्यमय हो गया।

अनहोनी की आशंका के चलते सोमवार रात को ही आकोला थाना पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद आकोला भाजपा ग्रामीण मण्डल अध्यक्ष शंभूलाल गाडरी, जेटीए मुकेश टेलर, ग्राम विकास अधिकारी प्रमोद सैनी सहित प्रशासनिक अमला और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर पहुंच गए। मोबाइल मिलने वाली जगह के पास स्थित बावड़ी और कुएं में गोताखोरों की मदद से उनकी सघन तलाश की गई।

परिजनों के अनुसार, इसी वर्ष 6 फरवरी को संविदा पर कार्यभार संभालने वाले राजीव सिंह लंबे समय से अवसाद (डिप्रेशन) से जूझ रहे थे और उनका उपचार चल रहा था। उन्होंने बताया कि छात्र जीवन में भी वे एक बार बिना बताए 4-5 दिनों के लिए घर से चले गए थे।

इस पूरे घटनाक्रम का मंगलवार को उस समय सुखद अंत हुआ जब तलाश में जुटी टीम को सूचना मिली कि राजीव सिंह कानड़खेड़ा की पहाड़ी पर स्थित बीजासन माता मंदिर परिसर में छिपे हुए हैं। मौके पर पहुंचे ग्रामीणों और पुलिस ने देखा कि उनके शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। तलाश करने वालों को देखते ही उन्होंने सबसे पहले पानी मांगा। जब लोगों ने उनसे इस तरह छिपने का कारण पूछा तो उन्होंने बदहवास हालत में कहा, "मुझे डर लग रहा था कि लोग मुझे पकड़ लेंगे, इसलिए मैं डरकर यहां आकर छिप गया।" इसके बाद पुलिस और प्रशासन ने उन्हें सुरक्षित अभिरक्षा में लेकर उनके परिजनों को सूचना दे दी।

Pratahkal Bureau

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