कृषि आदान विक्रेताओं की वर्षों से लंबित और ज्वलंत समस्याओं के निराकरण हेतु 'चित्तौड़गढ़ एग्रो इनपुट डीलर एसोसिएशन' ने सोमवार, 27 अप्रैल को देशव्यापी सांकेतिक हड़ताल का आह्वान करते हुए अपनी मांगों को लेकर हुंकार भरी। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया को एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा, जिसमें 12 सूत्रीय मांगों को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है।

एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने आक्रोश व्यक्त करते हुए बताया कि पिछले एक दशक से खाद, बीज और कीटनाशक विक्रेता गंभीर नीतिगत विसंगतियों के बीच व्यापार करने को मजबूर हैं। ज्ञापन में पुरजोर मांग की गई है कि खाद निर्माता कंपनियों द्वारा सब्सिडी वाली खाद के साथ अनुपयोगी उत्पादों को जबरन थोपने यानी 'लिंकिंग' की प्रक्रिया को तत्काल अपराध घोषित किया जाए। विक्रेताओं ने तर्क दिया कि वर्तमान व्यवस्था में खाद की डिलीवरी रेल-हेड पर दी जा रही है, जिसे बदलकर सीधे डीलर के बिक्री केंद्र पर सुनिश्चित किया जाना चाहिए, ताकि डीलरों पर पड़ने वाला 40-50 रुपये प्रति बैग का अतिरिक्त परिवहन भार समाप्त हो सके। बढ़ती महंगाई और परिचालन लागत को देखते हुए उर्वरकों पर डीलर मार्जिन बढ़ाकर न्यूनतम 8 प्रतिशत करने की भी मांग उठाई गई है।

कानूनी प्रावधानों पर आपत्ति दर्ज कराते हुए एसोसिएशन ने मांग की है कि कीटनाशक विधेयक 2025 में रिटेल डीलर को 'प्रथम पक्ष' बनाने के कठोर प्रावधान को शिथिल किया जाए। साथ ही, यह स्पष्ट किया जाए कि सीलबंद पैकिंग में नमूना फेल होने की स्थिति में विक्रेता के बजाय पूर्ण उत्तरदायित्व निर्माता कंपनी का होगा। व्यापारियों ने प्रतिवर्ष 'प्रिंसिपल सर्टिफिकेट' जोड़ने की अनिवार्यता समाप्त करने और खाद-बीज लाइसेंस की अवधि बढ़ाने की आवश्यकता पर भी बल दिया। इसके अतिरिक्त, किसानों द्वारा व्यापारियों को मानसिक व आर्थिक रूप से प्रताड़ित करने के उद्देश्य से की जाने वाली झूठी शिकायतों की निष्पक्ष जांच हेतु जिला स्तर पर एक विशेषज्ञ कमेटी के गठन की मांग की गई है, जिसकी अनुशंसा के बिना किसी भी व्यापारी पर सीधी कार्रवाई न की जाए।

ज्ञापन के माध्यम से सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी गई है कि यदि आगामी एक माह के भीतर इन विसंगतियों का उचित समाधान नहीं निकाला गया, तो खरीफ सीजन के आगाज़ से पूर्व देश भर के कृषि आदान व्यापारी अनिश्चितकालीन बंद का मार्ग अपनाने को विवश होंगे। इस आंदोलन की समस्त जिम्मेदारी केंद्र व राज्य सरकारों की होगी। इस अवसर पर क्षेत्र के प्रमुख व्यवसायी प्रतिष्ठानों जिनमें शुभलक्ष्मी बीज भंडार, शिव शक्ति बीज भंडार, महादेव कृषि केंद्र (आकोला), कालिका खाद बीज भंडार आकोला, सोनी एंड कम्पनी भूपालसागर, महक इंटरप्राइजेज भूपालसागर, खोडाजी कृर्षि केन्द्र आकोला, बालाजी सीट्स एंड पेस्टिसाइडस भूपालसागर और श्रीभेरुनाथ कृर्षि बीज भण्डार आकोला सहित कई अन्य विक्रेताओं ने हस्ताक्षर युक्त समर्थन देकर अपनी एकजुटता प्रदर्शित की।

Next Story