चित्तौड़गढ़: सांवलिया सेठ के दरबार में उमड़ा आस्था का सैलाब, लाखों भक्तों ने मंगला दर्शन के साथ किया नववर्ष का शंखनाद
चित्तौड़गढ़ के मण्डफिया स्थित श्री सांवलिया सेठ मंदिर में नववर्ष 2026 का भव्य स्वागत हुआ। मंगला दर्शन के साथ शुरू हुए इस उत्सव में 6 लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने हाजिरी लगाई। 5 किलोमीटर लंबी रेलिंग और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच भक्तों ने अपने आराध्य के दर्शन किए। जानिए कैसे पुलिस और मंदिर मंडल के सैकड़ों कर्मियों ने मिलकर इस आस्था के महाकुंभ को सफल बनाया।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान के सुप्रसिद्ध कृष्ण धाम मण्डफिया में नववर्ष का स्वागत भक्ति और श्रद्धा के अनूठे संगम के साथ हुआ। ईस्वी सन् 2026 के प्रथम सूर्योदय से पूर्व ही भगवान श्री सांवलिया सेठ के जयकारों से संपूर्ण मेवाड़ गुंजायमान हो उठा। नए साल की शुरुआत आराध्य के दर्शनों के साथ करने की चाह में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु मण्डफिया पहुंचे, जहां उन्होंने भगवान सांवलिया सेठ के दिव्य 'मंगला दर्शन' कर सुख-समृद्धि की कामना की। आस्था के इस महाकुंभ में भक्ति का ऐसा ज्वार उमड़ा कि सांय 5:00 बजे तक ही लगभग छह लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन लाभ ले चुके थे, जबकि देर रात तक यह आंकड़ा और अधिक बढ़ने की प्रबल संभावना बनी रही।
प्रशासन और मंदिर मंडल द्वारा भीड़ के इस भारी दबाव को पहले ही भांप लिया गया था। श्रद्धालुओं को सुलभ और सुव्यवस्थित दर्शन कराने के उद्देश्य से मंदिर मंडल ने व्यापक इंतजाम किए थे। मीरा सर्किल से लेकर मंदिर के सिंहद्वार तक लगभग 5 किलोमीटर लंबी 'जिग-जिग' रेलिंग तैयार की गई, ताकि कतारबद्ध तरीके से भक्त अपने आराध्य की एक झलक पा सकें। नववर्ष की पूर्व संध्या से ही श्रद्धालुओं का आगमन शुरू हो गया था, जिसे देखते हुए मंदिर प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए रात्रि 3:00 बजे से ही कतारबद्ध दर्शन की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी। श्रद्धा का आलम यह था कि शीतल लहर के बावजूद भक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और सिंहद्वार से लेकर मुख्य गर्भगृह तक केवल 'हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की' के स्वर गूंजते रहे।
सुरक्षा और सुव्यवस्था की कमान मंदिर प्रशासन और पुलिस विभाग ने संयुक्त रूप से संभाली। इस भव्य आयोजन को निर्विघ्न संपन्न कराने के लिए मंदिर मंडल के 335 समर्पित सुरक्षाकर्मियों के साथ पुलिस विभाग के विभिन्न रैंक के अधिकारियों सहित 370 पुलिसकर्मियों ने मोर्चा संभाला। मंदिर कर्मचारियों और सुरक्षा बलों ने तन-मन से अपनी भागीदारी निभाते हुए भीड़ को नियंत्रित किया और सुनिश्चित किया कि प्रत्येक श्रद्धालु मर्यादा के साथ दर्शन कर सके। भक्तों की सुविधा के लिए मंदिर मंडल द्वारा वाहन पार्किंग, कड़ाके की ठंड से बचाव हेतु अलाव, विश्राम के लिए बिस्तर, स्वच्छ पेयजल, सुलभ प्रसाधन और त्वरित चिकित्सा सुविधा जैसे तमाम इंतज़ाम किए गए थे।
रात्रि 11:00 बजे तक मंदिर के पट खुले रहने के चलते प्रशासन का अनुमान है कि अभी लगभग 2 से 3 लाख और श्रद्धालु दर्शन हेतु पधारेंगे। मण्डफिया की गलियों में तिल रखने की भी जगह शेष नहीं है, फिर भी व्यवस्थाएं सुचारू बनी हुई हैं। सांवलिया सेठ के प्रति यह अटूट विश्वास दर्शाता है कि आधुनिकता के इस दौर में भी लोगों की आध्यात्मिक जड़ें कितनी गहरी हैं। यह केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि नववर्ष के स्वागत का एक सात्विक और मर्यादित स्वरूप है, जिसने चित्तौड़गढ़ के धार्मिक पर्यटन के इतिहास में एक नया अध्याय लिख दिया है।

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