चित्तौड़गढ़: कल्याण चौक में उमड़ा भक्ति का सैलाब, संगीतमय सुंदरकांड से गुंजायमान हुई वीर प्रसूता धरा
चित्तौड़गढ़ के कल्याण चौक में श्री कल्लाजी वेदपीठ मंदिर मंडल न्यास द्वारा आयोजित प्रथम संगीतमय सुंदरकांड पाठ ने भक्ति का अनूठा इतिहास रचा। पंडित प्रहलाद कृष्ण की भावपूर्ण व्याख्या और सांवरिया सत्संग मंडल के भजनों से समूची कल्याण नगरी रामनाम के रस में सराबोर हो गई। भव्य श्रृंगार, महाआरती और आतिशबाजी के साथ संपन्न हुए इस आध्यात्मिक उत्सव की पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ें।

चित्तौड़गढ़। भक्ति और शक्ति की संगम स्थली चित्तौड़गढ़ की फिजाओं में गुरुवार की शाम एक अनूठी आध्यात्मिक ऊर्जा घुली नजर आई, जब कल्याण चौक परिसर साक्षात देवलोक के समान प्रतीत होने लगा। श्री कल्लाजी वेदपीठ मंदिर मंडल न्यास के तत्वावधान में आयोजित 'संगीतमय सुंदरकांड पाठ' ने न केवल भक्तों को भावविभोर किया, बल्कि समूची कल्याण नगरी को रामनाम के रस से सराबोर कर दिया। पौष शुक्ल त्रयोदशी की पावन संध्या वेला में आयोजित इस भव्य अनुष्ठान ने श्रद्धा और उल्लास के नए प्रतिमान स्थापित किए, जहाँ स्वर लहरियों के बीच हर हृदय केवल प्रभु श्री राम और लोक देवता कल्लाजी के चरणों में नतमस्तक दिखाई दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ वैदिक विधि-विधान और शास्त्रोक्त मंत्रोच्चार के बीच पूजा-अर्चना के साथ हुआ। श्री सांवरिया सत्संग मंडल के सानिध्य में आयोजित इस सुंदरकांड पाठ के मुख्य पाठकर्ता पंडित प्रहलाद कृष्ण एवं सहायक पाठक पंडित देवकिशन ने जब अपनी ओजस्वी वाणी में सस्वर पाठ का श्रीगणेश किया, तो वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया। इस आध्यात्मिक यात्रा में संगीत की संगत भरत कुमार शर्मा, पुष्कर वैष्णव, राजाराम गंधर्व एवं गोपाल शर्मा ने दी, जिनकी मधुर प्रस्तुतियों ने श्रोताओं को अंतर्मन तक झकझोर दिया। पाठ के मध्य जब 'कल्लाजी वेगा आजो', 'मोरे संकट काटो हनुमान' और 'मेरे बस सिया राम' जैसे भावनात्मक भजनों की प्रस्तुति दी गई, तो उपस्थित श्रद्धालु सुध-बुध खोकर झूमने लगे।
व्याख्यान के दौरान पंडित प्रहलाद कृष्ण ने सुंदरकांड के गूढ़ रहस्यों और दोहों का सरल हिंदी में भावार्थ समझाते हुए जीवन दर्शन प्रस्तुत किया। उन्होंने 'राम काजु कीन्हें बिनु मोहि कहां विश्राम' की व्याख्या करते हुए बताया कि हनुमान जी का यह संकल्प कर्म, निस्वार्थ सेवा और पूर्ण समर्पण का सर्वोच्च संदेश है, जो हमें सिखाता है कि लक्ष्य प्राप्ति तक विश्राम वर्जित है। संस्कृत के श्लोकों और हिंदी के भावार्थ ने आयोजन की आध्यात्मिक महत्ता को और अधिक प्रगाढ़ कर दिया।
आयोजन की भव्यता का आलम यह था कि संपूर्ण कल्याण चौक सतरंगी पुष्पों और दुधिया रोशनी की विद्युत साज-सज्जा से जगमगा उठा। यहाँ चतुर्भुज स्वरूप में विराजमान जयमल जी एवं कल्लाजी की प्रतिमाओं का मनोहारी श्रृंगार श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। पाठ की पूर्णाहुति पर सामूहिक हनुमान चालीसा का गान किया गया, जिसकी प्रतिध्वनि दूर-दूर तक सुनाई दी। इसके उपरांत रामायण जी और हनुमान जी की महाआरती उतारी गई तथा प्रभु श्री राम दरबार एवं ठाकुर श्री कल्लाजी की तस्वीरों की विधिवत पूजा कर भोग अर्पित किया गया। आसमान में हुई भव्य आतिशबाजी ने इस उत्सव में चार चांद लगा दिए।
कल्याण चौक पर पहली बार आयोजित हुए इस ऐतिहासिक संगीतमय सुंदरकांड पाठ में बड़ी संख्या में कल्लाजी भक्त, वीर-वीरांगनाएं, वेदपीठ के न्यासी एवं पदाधिकारी साक्षी बने। इस आयोजन ने न केवल धार्मिक चेतना को जागृत किया, बल्कि चित्तौड़गढ़ की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी एक नई ऊंचाई प्रदान की। देर रात तक चले इस भक्तिमय कार्यक्रम ने पूरी नगरी को राममय और कल्लाजीमय कर दिया।

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