चित्तौड़गढ़। मानवता की सेवा जब साधना बन जाए, तो दूरियां और दुर्गम रास्ते कभी बाधा नहीं बनते। चित्तौड़गढ़ और उदयपुर की धरा से उठा सेवा का एक ऐसा ही अटूट संकल्प पिछले 46 वर्षों से चिकित्सा जगत में सेवा की नई इबारत लिख रहा है। स्वामी रामदास की पावन स्मृति और संत रामज्ञानदास की दिव्य प्रेरणा को जीवंत रखते हुए, क्षेत्र के चिकित्सकों और समाजसेवियों का एक विशाल दल इस वर्ष भी नरपत खेड़ी स्थित ईनाणी मार्बल परिसर से उत्तर प्रदेश के लिए रवाना हुआ। यह केवल एक दल का प्रस्थान नहीं था, बल्कि उन हजारों जरूरतमंदों के लिए उम्मीद की एक नई किरण थी, जो बरसों से स्वास्थ्य सेवाओं की बाट जोह रहे हैं।

इस सेवा यात्रा का भव्य शुभारंभ ईनाणी मार्बल के प्रांगण में हुआ, जहाँ कैप्टन सुरेश ईनाणी, महेश ईनाणी, उद्धवदास रोगानी, रमेश ईनाणी, दामोदर सोमानी, सत्यनारायण सोमानी, श्यामलाल सोमानी, अनुज ईनाणी, अनिल ईनाणी, ईशान ईनाणी और ऋषि ईनाणी सहित गणमान्य नागरिकों ने पुष्पवर्षा और आत्मीय स्वागत के साथ दल को विदा किया। नब्बे सदस्यीय यह अनुशासित दल उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के सघन हंडियाकोल जंगल में स्थित श्रीराम वन कुटीर आश्रम में अपने पड़ाव डालेगा। यहाँ आयोजित होने वाले विशाल निःशुल्क चिकित्सा शिविर में यह टीम उन ग्रामीणों और वनवासियों का उपचार करेगी, जिनके लिए आधुनिक चिकित्सा आज भी एक सपना है।

डॉ. जे. के. छापरवाल ने इस अभियान की व्यापकता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि इस वर्ष चिकित्सा दल में विशेषज्ञता और अनुभव का अनूठा संगम है। दल में 40 अनुभवी चिकित्सक, 60 समर्पित नर्सिंग स्टाफ, 10 कुशल वैद्य और 5 तकनीशियन शामिल हैं। इसके साथ ही वार्ड बॉय, आया और समाजसेवी भी अपनी सेवाएं देने के लिए इस मिशन का हिस्सा बने हैं। इस सेवा यज्ञ की विशिष्टता यह है कि इसमें केवल स्थानीय ही नहीं, बल्कि कोलकाता, अहमदाबाद, भिवानी, दिल्ली, जयपुर, लखनऊ और हरियाणा जैसे देश के विभिन्न कोनों से आए नामचीन चिकित्सक भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।

इस शिविर की सफलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ केवल सामान्य परामर्श ही नहीं, बल्कि मोतियाबिंद, हर्निया, हाइड्रोसिल, बवासीर और गर्भाशय की ट्यूमर जैसे जटिल ऑपरेशन भी पूर्णतः निःशुल्क और आधुनिक मानकों के साथ किए जाते हैं। इस दुर्गम अभियान को सफल बनाने के लिए डॉ. जे. के. छापरवाल के नेतृत्व में डॉ. एस. के. सामर, डॉ. एच. एस. राठौड़, डॉ. राज बीर सिंह, डॉ. एस. एस. भारद्वाज, डॉ. एल. एल. सेन, डॉ. नीलाभ अग्रवाल, डॉ. गुमान सिंह, डॉ. बी. एस. बाबेल, डॉ. अर्चना अग्रवाल और डॉ. शरद नलवाया जैसे चिकित्सा विशेषज्ञ दिन-रात जुटे हुए हैं।

आयुर्वेद के माध्यम से उपचार प्रदान करने हेतु वैद्य लक्ष्मीकान्त आचार्य, जयन्त व्यास और अरुण व्यास की टीम तैयार है। वहीं, नर्सिंग सेवाओं की कमान संपत बराला, सुखलाल धाकड़, संतोषपुरी, सुरेश लॉवटी और दीपचंद रेगर ने संभाली है। व्यवस्थाओं को सुचारू बनाने के लिए वार्डबॉय हीरालाल खटीक, चमन लाल, रतन देवी, शिव लाल और समाजसेवी प्रकाश देवपुरा, दीपक पोद्दार, बुद्धिप्रकाश पारीक, भगवती प्रसाद शर्मा एवं विदेश जीनगर अपनी निस्वार्थ सेवाएं दे रहे हैं। करीब साढ़े चार दशकों से जारी यह सिलसिला आज एक वटवृक्ष का रूप ले चुका है, जो यह सिद्ध करता है कि चित्तौड़गढ़ की माटी में वीरता के साथ-साथ करुणा और परोपकार का रक्त भी उतनी ही प्रखरता से बहता है।

Pratahkal Newsroom

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