चित्तौड़गढ़: अरावली की रक्षा के लिए युवा शक्ति का सैलाब, निंबाहेड़ा से जिला मुख्यालय तक निकाली 35 किलोमीटर लंबी पदयात्रा
चित्तौड़गढ़ में अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर युवा कांग्रेस और एनएसयूआई ने निंबाहेड़ा से जिला मुख्यालय तक 35 किलोमीटर लंबी “अरावली बचाओ पदयात्रा” निकाली। केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य रखने के आरोपों के विरोध में हुए इस आंदोलन में सैकड़ों कार्यकर्ता और नागरिक शामिल हुए।

चित्तौड़गढ़। अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर चित्तौड़गढ़ जिले में मंगलवार को जनआंदोलन की स्पष्ट झलक देखने को मिली, जब केंद्र सरकार पर सुप्रीम कोर्ट में गलत तथ्य प्रस्तुत कर अरावली को खनन माफिया के हवाले करने के आरोपों के विरोध में युवा कांग्रेस एवं एनएसयूआई ने निंबाहेड़ा से चित्तौड़गढ़ तक 35 किलोमीटर लंबी “अरावली बचाओ पदयात्रा” निकाली। इस पदयात्रा ने पर्यावरण संरक्षण के सवाल को एक बार फिर सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में ला खड़ा किया।
राजस्थान सरकार के पूर्व सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना की प्रेरणा से यह पदयात्रा निंबाहेड़ा के पेच एरिया स्थित कांग्रेस कार्यालय से प्रारंभ हुई, जो मांगरोल, सतखंडा और शंभूपुरा होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय, चित्तौड़गढ़ पर संपन्न हुई। पदयात्रा का उद्देश्य केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट में कथित रूप से गलत तथ्य प्रस्तुत कर अरावली पर्वतमाला के नैतिक दोहन के विरोध में जनजागरूकता फैलाना और पर्यावरण पर पड़ रहे दुष्प्रभावों की ओर सरकार का ध्यान आकृष्ट करना रहा।
सैकड़ों कार्यकर्ताओं और नागरिकों की भागीदारी से पदयात्रा ने जनआंदोलन का स्वरूप ले लिया। यात्रा के दौरान “अरावली बचाओ” के नारों के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश जन-जन तक पहुंचाया गया। शांतिपूर्ण और अनुशासित ढंग से शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरती इस पदयात्रा को आमजन का व्यापक समर्थन मिला।
इस पदयात्रा में जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष प्रमोदसिंह सिसोदिया, बद्रीलाल जाट जगपुरा, विक्रम आंजना, रविप्रकाश सोनी, जसवंत सिंह आंजना सहित युवा कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारी, वरिष्ठ कांग्रेसजन, अग्रिम संगठनों के प्रतिनिधि तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। पदयात्रा के पश्चात सभी कार्यकर्ता जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचे और वहां धरने पर बैठकर वक्ताओं ने अपने विचार रखे।
कार्यकर्ताओं की मांग थी कि जिला कलेक्टर या उनका कोई प्रतिनिधि नीचे आकर ज्ञापन स्वीकार करे, ताकि वे अपनी बात सीधे प्रशासन के समक्ष रख सकें। हालांकि, अधिकारियों द्वारा ऐसा नहीं किए जाने पर पदयात्रियों ने जिला कलेक्टर कार्यालय के मुख्य द्वार पर ही ज्ञापन रखकर दंडवत प्रणाम करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। ज्ञापन में अवैध खनन से पर्यावरण, भूजल स्तर, वन्यजीवन और जनस्वास्थ्य पर पड़ रहे गंभीर दुष्प्रभावों का उल्लेख किया गया। साथ ही आगामी 21 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली पेशी के संदर्भ में मुख्यमंत्री से आग्रह किया गया कि वे राजस्थान की जनता की भावना के अनुरूप तथ्यों सहित प्रदेश का पक्ष मजबूती से रखें, ताकि अरावली पर्वतमाला का संरक्षण सुनिश्चित हो सके।
इस अवसर पर कन्हैया वैष्णव, संजय राव, विक्रम अहीर, जीवन आंजना, कमलेश धाकड़, पिंकेश जैन, आजाद, बापूलाल जाट, जगदीश मीणा, गुलाब धाकड़, बलवंत जाट, अशोक गुर्जर, रोमिल चौधरी, सुमित चपलोत, यशपाल सिंह शक्तावत, आशा राम गायरी, रामकिशन चौधरी, खुमेंद्र गुर्जर, संजय सेन, बंटी मीणा, कन्हैयालाल मेघवाल, राजू चारण, अजयसिंह राजपूत, उदयलाल मेनारिया, दीपक धाकड़, भंवरसिंह शक्तावत, राहुल सेन, धीरज नगरिया, कन्हैयालाल धाकड़, साजन सोनी, पंकज शर्मा, नितेश आंजना, संजय उपाध्यक्ष, मुकेश धाकड़ सहित सैकड़ों कार्यकर्ता और आमजन उपस्थित रहे। यह पदयात्रा न केवल एक विरोध प्रदर्शन रही, बल्कि अरावली पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर समाज की सामूहिक चेतना और प्रतिबद्धता का सशक्त प्रतीक बनकर उभरी।

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