चित्तौड़गढ़: जौहर स्मृति संस्थान के पुरोधा स्व. उम्मेद सिंह की सातवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, स्मृतियों में जीवित हुए 'डिंगल' के स्वर
चित्तौड़गढ़ में जौहर स्मृति संस्थान के पूर्व अध्यक्ष और डिंगल कवि स्व. उम्मेद सिंह धोली की सातवीं पुण्यतिथि पर भव्य श्रद्धांजलि सभा का आयोजन हुआ। 40 वर्षों तक संस्थान का नेतृत्व करने वाले महान साहित्यकार और इतिहासकार को याद करते हुए वक्ताओं ने सरकार से उनकी स्मृति को अक्षुण्ण रखने की मांग की। मेवाड़ी संस्कृति और मातृभाषा के प्रति उनके समर्पण को आज भी जन-जन द्वारा सराहा जा रहा है।

चित्तौड़गढ़। शौर्य और भक्ति की पावन धरा चित्तौड़गढ़ में आज एक ऐसी विभूति को नमन किया गया, जिन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मेवाड़ की संस्कृति, इतिहास और मातृभाषा की सेवा में समर्पित कर दिया। जौहर स्मृति संस्थान के पूर्व अध्यक्ष, प्रख्यात साहित्यकार और डिंगल भाषा के अनन्य उपासक राज ऋषि ठाकुर स्व. उम्मेद सिंह धोली की सातवीं पुण्यतिथि पर जौहर भवन में श्रद्धासुमन अर्पित किए गए। यह अवसर केवल एक शोक सभा नहीं, बल्कि एक युगद्रष्टा के कृतित्व को याद करने का संस्मरण बन गया।
स्व. उम्मेद सिंह धोली का व्यक्तित्व बहुआयामी था; वे न केवल एक कुशल इतिहासकार थे, बल्कि डिंगल भाषा के ऐसे ओजस्वी कवि थे जिनकी जिह्वा पर साक्षात मां सरस्वती का वास माना जाता था। लगातार 40 वर्षों तक जौहर स्मृति संस्थान के आजीवन अध्यक्ष के रूप में उन्होंने संस्था को वटवृक्ष की भांति सींचा। उनके द्वारा रचित दोहे और कविताएं आज भी राजस्थानी साहित्य की अमूल्य निधि हैं। मातृभाषा के प्रति उनका अनुराग इस कदर गहरा था कि उन्होंने राजस्थानी 'मायड़' भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए निरंतर संघर्ष किया और अपनी लेखनी के माध्यम से जन-जागरण की मशाल जलाए रखी।
श्रद्धांजलि सभा के दौरान उपस्थित गणमान्य नागरिकों ने उनके योगदान को याद करते हुए स्वर बुलंद किया कि ऐसे मनीषी का सम्मान केवल स्मृतियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। वक्ताओं ने नगर परिषद, राजनीतिक दलों और राज्य सरकार से मांग की कि स्व. धोली की स्मृति में स्थाई स्मारक या अन्य जनहितैषी कार्य किए जाएं, ताकि भावी पीढ़ी उनके राष्ट्रप्रेम और संस्कृति संवर्धन के संकल्पों से निरंतर प्रेरणा लेती रहे।
इस भावपूर्ण आयोजन में संस्थान की महिला उपाध्यक्ष निर्मला कंवर, महामंत्री तेजपाल सिंह शक्तावत, संयुक्त मंत्री गजराज सिंह, कोषाध्यक्ष गोवर्धन सिंह भाटी, नरपत सिंह भाटी, राजेन्द्र सिंह, भंवर सिंह, नरोत्तम सिंह सोलंकी, सुरेंद्र सिंह, जोगेन्द्र सिंह, जगपाल सिंह और श्रीनाथ सिंह सहित समाज के कई प्रतिष्ठित लोग मौजूद रहे। सभी ने स्व. धोली के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया। अंततः, यह कार्यक्रम इस संदेश के साथ संपन्न हुआ कि उम्मेद सिंह धोली जैसे व्यक्तित्व मरते नहीं, बल्कि अपनी कृतियों और विचारों के माध्यम से समाज के मानस पटल पर सदैव अमर रहते हैं।

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