चित्तौड़गढ़: अटूट आस्था का पैदल सफर, 1200 किमी की दूरी तय कर बागेश्वर धाम पहुंचेंगे उदयपुर के भक्त
उदयपुर से बागेश्वर धाम के लिए 1200 किमी की पैदल यात्रा पर निकले 20 भक्तों का चित्तौड़गढ़ में भव्य स्वागत किया गया। यह जत्था पीठाधीश्वर धीरेन्द्र शास्त्री को उदयपुर के संकट मोचन बागेश्वर धाम मंदिर की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का निमंत्रण देने जा रहा है। जानिए इस साहसिक और भक्तिपूर्ण सफर की पूरी कहानी, जिसमें श्रद्धा और संकल्प का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है।

चित्तौड़गढ़। भक्ति की शक्ति जब संकल्प का रूप लेती है, तो राह की दूरियां स्वतः ही सिमटने लगती हैं। कुछ ऐसा ही अनूठा दृश्य चित्तौड़गढ़ की पावन धरा पर देखने को मिला, जब उदयपुर से मध्यप्रदेश के छतरपुर स्थित बागेश्वर धाम के लिए निकले पदयात्रियों के जत्थे ने शहर में प्रवेश किया। श्रद्धा और उल्लास के इस संगम में बोजुन्दा सरस डेयरी के समीप स्थित मारुति नंदन आश्रम बालाजी मंदिर जयकारों से गूंज उठा। यहां उदयपुर से आए इन संकल्पित यात्रियों का भव्य स्वागत किया गया, जो एक विशेष मिशन के साथ भीषण यात्रा पर निकले हैं।
इस गौरवमयी यात्रा की अगुवाई कर रहे महेंद्र सिंह राणावत ने जानकारी साझा करते हुए बताया कि उदयपुर से लगभग 20 श्रद्धालुओं का यह दल अपनी अटूट आस्था को साथ लेकर बागेश्वर धाम के लिए पैदल रवाना हुआ है। यह यात्रा केवल आस्था का प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण निमंत्रण का माध्यम भी है। दरअसल, उदयपुर के बड़ी गांव में नवनिर्मित हो रहे 'संकट मोचन बागेश्वर धाम बालाजी मंदिर' की मूर्ति प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन होना निश्चित हुआ है। इसी पावन आयोजन का निमंत्रण बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर आचार्य धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री तक पहुंचाने के लिए यह जत्था लगभग 1200 किलोमीटर की दुर्गम दूरी को 20 दिनों में पैदल तय करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है।
चित्तौड़गढ़ पहुंचने पर इन यात्रियों के उत्साहवर्धन और सम्मान के लिए स्थानीय श्रद्धालुओं ने पलक-पावड़े बिछा दिए। मारुति नंदन आश्रम में आयोजित इस स्वागत कार्यक्रम के दौरान गजेंद्र चौरसिया, रामरतन कुमावत, मयंक छीपा, पीयूष परिहार, अभिमन्यु सिंह, रतनलाल गुर्जर और पंडित अरविंद सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी पदयात्रियों का फूल-मालाओं, तिलक और उपरना ओढ़ाकर अभिनंदन किया गया। इस दौरान वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखा।
यह पदयात्रा न केवल राजस्थान और मध्यप्रदेश के धार्मिक संबंधों को प्रगाढ़ कर रही है, बल्कि आधुनिक युग में सनातन संस्कृति के प्रति युवाओं और भक्तों के समर्पण की एक जीवंत मिसाल भी पेश कर रही है। चित्तौड़गढ़ से रवाना होकर यह जत्था अब अपनी अगली मंजिल की ओर बढ़ चुका है, जहां बागेश्वर धाम में आचार्य धीरेन्द्र शास्त्री को मेवाड़ की धरा से भेजा गया यह ऐतिहासिक निमंत्रण सौंपा जाएगा। यह यात्रा आने वाले दिनों में बड़ी गांव के नवनिर्मित मंदिर के लिए मील का पत्थर साबित होगी।

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