चित्तौड़गढ़ में तीन दिवसीय 35वें मीरा महोत्सव का समापन भक्ति संगीत, शास्त्रीय नृत्य और आकर्षक नृत्य नाटिकाओं की मनमोहक प्रस्तुतियों के साथ हुआ। मीरा स्मृति संस्थान की ओर से आयोजित महोत्सव के अंतिम दिन रविवार को कलाकारों ने अपनी कला के माध्यम से भक्त शिरोमणि मीराबाई की कृष्णभक्ति, समर्पण और आध्यात्मिक चेतना को सजीव रूप में प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में पूर्व राज्यसभा सांसद नारायण पंचारिया एवं जिला कोषाधिकारी राघव शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

समापन समारोह में दिल्ली की प्रसिद्ध गायिका विधि शर्मा ने भक्ति संगीत और मीरा भजनों की प्रस्तुति दी। उनके मधुर स्वरों में गूंजे भक्ति गीतों ने श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। मीरा के भजनों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति, प्रेम और समर्पण की अनुभूति हुई। उत्तर-मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, प्रयागराज के प्रायोजन में आयोजित इस प्रस्तुति ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया। श्रोताओं ने देर तक भक्ति संगीत का आनंद लिया।

इसके बाद ‘मीरा भक्ति के सागर’ शीर्षक से कथक नृत्य प्रस्तुति हुई। कथक कलाकार सदानन्द बिस्वास की संकल्पना, नाट्य रूपांतरण एवं निर्देशन में दिल्ली के कथक कलाकारों ने नृत्य के माध्यम से मीरा के जीवन और उनकी कृष्णभक्ति को अभिव्यक्त किया। कलाकारों की भावपूर्ण मुद्राओं, लयबद्ध पद संचालन और आकर्षक नृत्य संयोजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के प्रायोजन में प्रस्तुत इस कार्यक्रम में शास्त्रीय नृत्य की सुंदरता और आध्यात्मिक भावों का अनूठा संगम देखने को मिला। कलाकारों ने भारतीय शास्त्रीय नृत्य की समृद्ध परंपरा और मीरा की भक्ति भावना को प्रभावी ढंग से मंच पर साकार किया।

महोत्सव की एक अन्य प्रमुख प्रस्तुति ‘मीरा-माधव नृत्य नाटिका’ रही। बृजभूषण एकेडमी, बेंगलोर के कलाकारों ने नाट्यश्री ब्रज दिव्य भूषण के नृत्य निर्देशन में मीरा के जीवन और उनके आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अटूट प्रेम एवं समर्पण को मंच पर साकार किया। उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, पटियाला के प्रायोजन में हुई इस प्रस्तुति में नृत्य, संगीत, भावाभिव्यक्ति और मंच सज्जा के माध्यम से भारतीय सांस्कृतिक परंपरा की सुंदर झलक देखने को मिली। कलाकारों ने मीरा और माधव के आध्यात्मिक संबंध को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। प्रस्तुति के दौरान दर्शक भावविभोर नजर आए।

कार्यक्रम के प्रारंभ में मीरा स्मृति संस्थान के कार्यवाहक अध्यक्ष अर्जुन मुंदड़ा ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने मीरा महोत्सव के 35 वर्षों के सफर पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए आयोजन की शुरुआत से लेकर वर्तमान स्वरूप तक की जानकारी दी। कार्यक्रम के संयोजक अनंत समदानी ने आभार व्यक्त करते हुए अतिथियों, कलाकारों, सांस्कृतिक संस्थानों, सहयोगियों एवं शहरवासियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन लीला आगाल ने किया।

महोत्सव के समापन अवसर पर संस्थान के सचिव राकेश मंत्री, कोषाध्यक्ष विनायक द्विवेदी, कार्यकारिणी सदस्य विट्ठल पांडे, प्रदीप दीक्षित, अमरकंठ उपाध्याय, जेपी भटनागर, ओमप्रकाश ओदिच्य, डीपी चतुर्वेदी, अशोक अजमेरा, प्रदीप काबरा, अभिमन्यु समदानी, अनुराग द्विवेदी, कल्याणी दीक्षित, भारती काबरा, रेखा समदानी और राशि मुंदड़ा सहित संस्थान के पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहे। कलाकारों की यादगार प्रस्तुतियों और दर्शकों की उत्साहपूर्ण सहभागिता के साथ तीन दिवसीय 35वें मीरा महोत्सव का समापन हुआ।

Piyush Mundara, Chittorgarh

Piyush Mundara, Chittorgarh

नाम: पियूष मूंदड़ा

वर्तमान पद: संवाददाता

कार्यक्षेत्र: चित्तौड़गढ़ (राजस्थान)

अनुभव: साल 2013 से

विशेष रुचि: अपराध (क्राइम) और वन्य जीव (Wildlife) रिपोर्टिंग

बीट और कवरेज 

  • स्थानीय समाचार: चित्तौड़गढ़ जिला और संबंधित तहसीलों की सभी स्थानीय खबरों की नियमित कवरेज।
  • क्राइम एवं वन्य जीव: पुलिस कार्रवाई, कानून-व्यवस्था, अपराध संबंधी घटनाओं के साथ-साथ वन्य जीव और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों की विशेष रिपोर्टिंग।
  • राजनीति: स्थानीय निकाय, संगठनात्मक गतिविधियां और क्षेत्रीय राजनीतिक घटनाक्रम।
  • प्रशासन: सरकारी विभागों की कार्यप्रणाली, प्रशासनिक निर्णय, जनसुनवाई और विकास कार्यों की समीक्षा।
  • शिक्षा एवं स्वास्थ्य: शैक्षणिक संस्थानों की गतिविधियां, विद्यार्थियों से जुड़े मुद्दे, चिकित्सा सेवाएं और स्वास्थ्य योजनाओं का कवरेज।
  • बिज़नेस: स्थानीय बाजार, व्यापारिक गतिविधियां और आर्थिक समाचार।

शैक्षणिक योग्यता

  • स्नातक (Graduate)
  • डिप्लोमा इन जर्नलिज्म (Diploma in Journalism)

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