चित्तौड़गढ़। शहर के बहुचर्चित व्यापारी रमेश ईनाणी हत्याकांड में नया मोड़ आया है। इस मामले में संलिप्तता के आरोपों के बाद अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संत रमताराम और संत भजनाराम को अपने संगठन से बाहर कर दिया है।

अंतर्राष्ट्रीय रामस्नेही संप्रदाय के शीर्ष नेतृत्व ने एक लिखित आदेश जारी कर स्पष्ट किया कि अब संत रमताराम और संत भजनाराम का संप्रदाय की किसी भी गतिविधि या पहचान से कोई संबंध नहीं रहेगा। इस फैसले के पीछे संप्रदाय की साख और मर्यादा को सुरक्षित रखना बताया गया है।

मामला 11 नवंबर का है, जब चित्तौड़गढ़ शहर में दिनदहाड़े व्यापारी रमेश ईनाणी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस की तत्परता से इस हत्याकांड में महत्वपूर्ण सफलता मिली और उत्तर प्रदेश निवासी शूटर मनीष दुबे को गिरफ्तार किया गया। पूछताछ में मनीष दुबे ने हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया, जिसमें संत रमताराम का नाम मुख्य साजिशकर्ता के रूप में सामने आया।

संत रमताराम की गिरफ्तारी से बचने के प्रयास में उनके अधिवक्ता ने न्यायालय में अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, लेकिन पुलिस द्वारा प्रस्तुत साक्ष्यों और मामले की गंभीरता को देखते हुए न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज कर दी। संप्रदाय से निष्कासन और न्यायालय से राहत न मिलने के बाद संत रमताराम की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।

चिंतौड़गढ़ पुलिस अब संत रमताराम की गिरफ्तारी के लिए पूरी तरह सक्रिय है। पुलिस की विशेष टीमें संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रही हैं और अधिकारियों का मानना है कि संत की गिरफ्तारी से इस हत्याकांड के पीछे के और भी कई बड़े राज सामने आ सकते हैं।

यह मामला न केवल चित्तौड़गढ़ शहर बल्कि पूरे क्षेत्र में सनसनी फैलाने वाला साबित हुआ है, और संत रमताराम व भजनाराम का निष्कासन इस मामले में संप्रदाय की जिम्मेदारी और कठोर कदमों की झलक दिखाता है।

Next Story