लोक उद्यम विभाग के आदेश के बावजूद दूरसंचार विभाग द्वारा बढ़ा हुआ महंगाई भत्ता जारी नहीं करने पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों ने चित्तौड़गढ़ दूरसंचार केंद्र पर धरना दिया।

अखिल भारतीय स्तर पर सेवानिवृत्त कर्मचारियों के अधिकारों की आवाज बुलंद करते हुए ऑल इंडिया बीएसएनएल डॉट पेंशनर्स एसोसिएशन के तत्वावधान में चित्तौड़गढ़ स्थित दूर संचार केंद्र के बाहर एक विशाल और आक्रोशपूर्ण धरना प्रदर्शन किया गया। यह उग्र विरोध प्रदर्शन दूरसंचार विभाग द्वारा पेंशनर्स के आगामी 1 जनवरी से बढ़े हुए महंगाई भत्ते का भुगतान आदेश अब तक जारी नहीं करने के विरोध में आयोजित किया गया है। लोक उद्यम विभाग द्वारा 1 जनवरी से बढ़े हुए भत्ते के आधिकारिक आदेश काफी समय पूर्व ही जारी किए जा चुके हैं, परंतु दूरसंचार विभाग की इस ढुलमुल नीति और आदेश जारी करने में की जा रही अत्यधिक देरी के कारण सेवानिवृत्त पेंशनर्स में वर्तमान सरकार के प्रति भारी रोष और गहरा असंतोष व्याप्त हो गया है।

दूर संचार केंद्र के समक्ष आयोजित इस धरने को संगठन के प्रमुख नेताओं रामचंद्र रैगर, पारस मल जैन व विमल प्रकाश सांखला ने संयुक्त रूप से संबोधित किया। उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने तीखे शब्दों में कहा कि सरकार का रवैया बीएसएनएल डॉट पेंशनर्स के प्रति अत्यंत उदासीन और पूरी तरह से भेदभाव पूर्ण है। उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता और नाराजगी व्यक्त की कि पिछले 10 वर्षों से इन सेवानिवृत्त कर्मचारियों को वेतन आयोग का न्यायसंगत लाभ नहीं दिया जा रहा है। इसके साथ ही नेताओं ने सरकार की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि जो महंगाई भत्ता वर्तमान में मिल रहा है, उसे भी सरकार अब पूरी तरह से बंद करना चाहती है। उन्होंने सरकार को दो टूक चेतावनी देते हुए कहा कि हम सरकार की इस दमनकारी मंशा को किसी भी सूरत में पूरी नहीं होने देंगे तथा हमारा केंद्रीय नेतृत्व जो भी आगामी फैसला लेगा, उसके अनुरूप हम बड़े से बड़ा आंदोलन करने में भी पीछे नहीं हिचकेंगे।

इस महत्वपूर्ण और निर्णायक विरोध सभा में रोड मल शर्मा, सी पी खटोड़, मनवीर सिंह, मोहन लाल खटीक, मांगी लाल शर्मा, चंद्र सिंह, कैलाश शर्मा, कैलाश छीपा सहित बहुत बड़ी संख्या में क्षेत्र के सेवानिवृत्त पेंशनर्स ने अपनी सक्रिय भागीदारी दर्ज कराई। अपनी जायज मांगों को लेकर लामबंद हुए इन बुजुर्ग पेंशनर्स का यह एकजुट प्रयास न केवल उनके भीतर पनप रहे जबरदस्त आक्रोश को रेखांकित करता है, बल्कि यह दूरसंचार विभाग और सरकार के प्रशासनिक तंत्र को भी एक सीधी चेतावनी है कि यदि उनके अधिकारों का दमन करने की कोशिश की गई, तो आगामी दिनों में यह आंदोलन और अधिक उग्र रूप धारण कर सकता है।

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