बस्सी में खूनी रफ्तार का तांडव: मजदूर की मौत के बाद मुआवजे की मांग पर अड़ा परिवार, मोर्चरी के बाहर भारी हंगामा
चित्तौड़गढ़ के बस्सी में पालका हाईवे पर अज्ञात वाहन की टक्कर से मजदूर रणजीत गाड़ियालौहार की मौत के बाद भारी बवाल मच गया। परिजनों ने 50 लाख मुआवजे और नौकरी की मांग को लेकर शव लेने से इनकार कर दिया है। घायल सोनू और राहुल का उपचार जारी है, वहीं पुलिस सीसीटीवी के जरिए आरोपी वाहन की तलाश में जुटी है।

बस्सी/चित्तौड़गढ़। राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले के अंतर्गत आने वाले बस्सी क्षेत्र में एक दर्दनाक सड़क हादसे ने न केवल एक परिवार का चिराग बुझा दिया, बल्कि पूरे इलाके में तनाव की स्थिति पैदा कर दी है। पालका हाईवे चौराहे के पास मंगलवार को हुई एक भीषण दुर्घटना ने उस वक्त मातम फैला दिया जब मजदूरी कर घर लौट रहे तीन युवकों को एक अज्ञात वाहन ने अपनी बेरहम रफ्तार का शिकार बना लिया। इस हादसे में एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि दो अन्य जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। घटना के दूसरे दिन भी न्याय की मांग को लेकर परिजनों और ग्रामीणों का आक्रोश चरम पर रहा, जिसके चलते अस्पताल परिसर छावनी में तब्दील नजर आया।
घटनाक्रम के अनुसार, आंवलहेड़ा निवासी तीन युवक—रणजीत, सोनू और राहुल—दिन भर की कड़ी मेहनत के बाद अपनी मोटरसाइकिल पर सवार होकर खुशी-खुशी घर लौट रहे थे। जैसे ही उनकी बाइक पालका फोरलेन चौराहे के समीप पहुंची, पीछे से काल बनकर आए एक अज्ञात वाहन ने उन्हें जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि मोटरसाइकिल के परखच्चे उड़ गए और तीनों युवक हवा में उछलकर काफी दूर जा गिरे। मौके पर मौजूद राहगीरों और ग्रामीणों ने जब यह मंजर देखा तो उनके रोंगटे खड़े हो गए। तुरंत टोल प्लाजा की एंबुलेंस को सूचना दी गई और तीनों को लहूलुहान हालत में बस्सी उपजिला चिकित्सालय पहुंचाया गया।
अस्पताल पहुँचते ही चिकित्सकों ने रणजीत पुत्र कालु गाड़ियालौहार को मृत घोषित कर दिया, जिससे वहां मौजूद लोगों में शोक की लहर दौड़ गई। वहीं, गंभीर रूप से घायल सोनू और राहुल की नाजुक स्थिति को देखते हुए उन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तुरंत सांवलियाजी जिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया। बुधवार को जब मृतक के शव का पोस्टमार्टम होना था, तब परिजनों और ग्रामीणों ने न्याय की मांग को लेकर मोर्चा खोल दिया। आक्रोशित भीड़ ने शव लेने से साफ इनकार कर दिया और चिकित्सालय के बाहर धरने पर बैठ गए। प्रदर्शनकारियों की स्पष्ट मांग है कि पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये का नकद मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दी जाए।
प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारियों ने सुबह से लेकर शाम तक ग्रामीणों को समझाने का पुरजोर प्रयास किया, लेकिन प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अडिग रहे। इस बीच, पुलिस की जांच में एक महत्वपूर्ण सुराग हाथ लगा है। घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में एक संदिग्ध कार तेजी से गुजरती हुई दिखाई दी है, जिसे इस हादसे का जिम्मेदार माना जा रहा है। पुलिस प्रशासन अब उस अज्ञात कार और उसके चालक की सरगर्मी से तलाश कर रहा है। फिलहाल रणजीत का शव मोर्चरी में ही रखा हुआ है और ग्रामीणों का धरना जारी है, जिसने प्रशासन के सामने एक बड़ी चुनौती पेश कर दी है। यह घटना दर्शाती है कि सड़कों पर बेलगाम दौड़ते वाहन किस तरह मासूम जिंदगियों को लील रहे हैं और उसके बाद उपजने वाला जन-आक्रोश व्यवस्था के प्रति गहरी नाराजगी को व्यक्त कर रहा है।

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