निम्बाहेड़ा के किसानों के लिए बड़ी खुशखबरी: अब 25 जनवरी तक मिलेगी समर्थन मूल्य पर उपज बेचने की बड़ी राहत
निम्बाहेड़ा के किसानों के लिए राजफेड का बड़ा फैसला! समर्थन मूल्य खरीद वर्ष 2025-26 के तहत मूंगफली, सोयाबीन और उड़द की तुलाई की समय-सीमा अब 25 जनवरी 2026 तक बढ़ा दी गई है। 20 दिसंबर के बाद वंचित रहे किसान अब क्रय केंद्रों पर अपनी उपज तौलवा सकेंगे। जानिए इस महत्वपूर्ण निर्णय और नई समय-सीमा की पूरी जानकारी इस विस्तृत रिपोर्ट में।

निम्बाहेड़ा। हाड़ौती और मेवाड़ के अन्नदाताओं के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है, जहां राजफेड ने किसानों के हितों को सर्वोपरि रखते हुए समर्थन मूल्य पर जिंसों की खरीद की समय-सीमा में बड़ा विस्तार किया है। निम्बाहेड़ा क्षेत्र सहित पूरे प्रदेश के उन किसानों के लिए यह किसी वरदान से कम नहीं है, जो किन्हीं कारणोंवश अपनी मेहनत की कमाई को सरकारी कांटों पर नहीं तौलवा सके थे। जयपुर स्थित राजफेड प्रधान कार्यालय के ताजा निर्देशों ने अब उन वंचित किसानों की उम्मीदों को फिर से जगा दिया है, जिनकी कृषि उपज की तुलाई की समय-सीमा पूर्व में समाप्त हो चुकी थी।
समर्थन मूल्य खरीद वर्ष 2025-26 के इस महत्वपूर्ण पड़ाव में मूंगफली, सोयाबीन और उड़द की खेती करने वाले किसानों को प्रशासन ने एक अंतिम और सुनहरा अवसर प्रदान किया है। आधिकारिक सूचना के अनुसार, जिन किसानों को 20 दिसंबर 2025 के बाद अपनी जिंस की तुलाई के लिए दिनांक आवंटित की गई थी, लेकिन वे निर्धारित 10 दिनों की अनिवार्य समय-सीमा के भीतर क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंच पाए थे, उन्हें अब घबराने की आवश्यकता नहीं है। सरकार ने उनकी समस्याओं और व्यावहारिक कठिनाइयों को समझते हुए तुलाई की अंतिम तिथि को बढ़ाकर अब 25 जनवरी 2026 कर दिया है।
इस निर्णय के कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर गौर करें तो यह कदम सीधे तौर पर किसानों को बिचौलियों के चंगुल से बचाने और उन्हें उनकी फसल का उचित लाभकारी मूल्य दिलाने की दिशा में उठाया गया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार केवल उन किसानों के लिए है जो पहले आवंटित तिथि पर उपस्थित नहीं हो सके थे। स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों ने सभी वंचित किसानों से पुरजोर अपील की है कि वे इस विस्तारित अवधि का लाभ उठाएं और 25 जनवरी तक हर हाल में अपने नजदीकी क्रय केंद्रों पर पहुंचकर तुलाई की प्रक्रिया पूर्ण करवाएं।
इस समय-सीमा के विस्तार का सीधा प्रभाव क्षेत्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा, क्योंकि इससे मूंगफली और सोयाबीन जैसी प्रमुख नकदी फसलों का सही मूल्य सीधे किसानों के खातों में पहुंच सकेगा। समय रहते जिंसों की तुलाई सुनिश्चित करना न केवल किसानों के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है, बल्कि यह समर्थन मूल्य योजना की सफलता के लिए भी मील का पत्थर साबित होगा।

Pratahkal Bureau
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