राजस्थान के भूपालसागर में आवारा कुत्तों के हमलों में कई मवेशियों की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से नसबंदी और मुआवजे की मांग की है।

भूपालसागर कस्बे एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। पालतू मवेशियों, विशेषकर बछड़ों पर हो रहे हमलों से पशुपालकों में भय और आक्रोश का माहौल है। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल प्रभावी कार्रवाई की मांग करते हुए उपखण्ड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा है।

ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले कुछ समय में भूपालसागर क्षेत्र में आवारा कुत्तों की संख्या अचानक बढ़ गई है। उनका कहना है कि आसपास के कस्बों एवं नगरपालिका क्षेत्रों से आवारा कुत्तों को पकड़कर भूपालसागर क्षेत्र में छोड़ा जा रहा है। इसके कारण जगह-जगह कुत्तों के झुंड घूमते दिखाई दे रहे हैं, जिससे आमजन का आवागमन भी प्रभावित हो रहा है।

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि कस्बे तथा हाईवे किनारे संचालित कुछ मांस विक्रेता मांस के अवशेष एवं अन्य अपशिष्ट खुले में फेंक देते हैं। इससे बड़ी संख्या में आवारा कुत्ते वहां एकत्रित हो रहे हैं और उनका व्यवहार अधिक आक्रामक होता जा रहा है।

ग्रामीणों के अनुसार भोजन की तलाश में कुत्ते 8 से 10 फीट ऊंची दीवारें लांघकर मवेशियों के बाड़ों में घुस जाते हैं और बछड़ों पर हमला कर उन्हें अपना शिकार बना रहे हैं। शिकायत पत्र में दावा किया गया है कि अब तक इन हमलों में लगभग 100 से 150 बछड़ों की मौत हो चुकी है, जिससे पशुपालकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

गौशाला अध्यक्ष छोगालाल तेली ने प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कहा कि यदि आबादी क्षेत्र के सुरक्षित बाड़ों में बंधे मवेशी भी सुरक्षित नहीं हैं तो बिना चारदीवारी वाली गौशाला में गायों और बछड़ों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता बनी हुई है। उन्होंने समस्या के स्थायी समाधान की मांग की।

ग्रामीणों ने उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया को लिखित शिकायत देकर पूरे मामले से अवगत कराया। उपखण्ड अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। साथ ही मांस विक्रेताओं को आबादी क्षेत्र के समीप खुले में मांस का कचरा नहीं फेंकने के लिए पाबंद करने का आश्वासन भी दिया।

ग्रामीणों ने मांग की कि खुले में मांस का कचरा फेंकने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए, आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने के लिए नसबंदी अथवा अन्यत्र स्थानांतरण अभियान चलाया जाए तथा जिन पशुपालकों के मवेशियों की मौत हुई है, उन्हें उचित मुआवजा दिया जाए।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।

इस दौरान गौशाला अध्यक्ष छोगालाल तेली, सीता जाट, सतीश, सुशील, अजय धोबी, लक्ष्मी रावत, हिम्मतलाल डांगी, जगदीश, प्रेमी, दीपक विजयवर्गीय, उदयलाल, लालूराम, सुरेश गर्ग, नरेश, रतनलाल बैरवा, योगेश टांक, रमेश लौहार, रतनलाल नायक, मोहनलाल, अरुण, रामेश्वरलाल धोबी, राजकुमार लौहार, राजू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे।

Pratahkal Bureau

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