भूपालसागर: एसडीएम के औचक निरीक्षण में खुली पोल, जर्जर भवन और गंदगी पर भड़के
उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया ने आंगनबाड़ी और राजकीय विद्यालय में संसाधनों की कमी और गंदगी पाए जाने पर अधिकारियों को व्यवस्था सुधारने के कड़े निर्देश दिए।

उपखण्ड क्षेत्र में सरकारी संस्थानों की बदहाली और संसाधनों के अभाव का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। शुक्रवार को उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया ने क्षेत्र के शिक्षण संस्थानों एवं आंगनबाड़ी केंद्रों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का बारीकी से जायजा लिया, जिसमें कई गंभीर कमियां उजागर हुई हैं। प्रातःकाल संवाददाता अरविंद गर्ग के अनुसार, एसडीएम ने विशेष रूप से आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-1 और राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भूपालसागर का दौरा किया, जहां अव्यवस्थाओं को देखकर उन्होंने नाराजगी जाहिर की और तत्काल सुधार के कड़े दिशा-निर्देश जारी किए।
निरीक्षण का सबसे चिंताजनक पहलू आंगनबाड़ी केंद्र संख्या-1 में देखने को मिला, जहां सुविधाओं का भारी टोटा नजर आया। रिकॉर्ड के अनुसार पंजीकृत 22 बच्चों में से मौके पर केवल 12 बच्चे ही उपस्थित मिले। इस पर एसडीएम ने बच्चों की शत-प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने और अभिभावकों को प्रेरित करने के सख्त निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान केंद्र का भवन जर्जर अवस्था में पाया गया, जिसे देख एसडीएम ने स्पष्ट किया कि भवन की दयनीय स्थिति और बैठने की समुचित व्यवस्था का अभाव नौनिहालों के भविष्य और सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती है। हालांकि, निरीक्षण के वक्त बच्चों को नियमानुसार ‘मीठा दलिया’ वितरित किया जा रहा था, किंतु एसडीएम ने संबंधित अधिकारियों को भवन की मरम्मत, आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता और स्वच्छता व्यवस्था को प्राथमिकता के आधार पर दुरुस्त करने को कहा है।
आंगनबाड़ी के पश्चात उपखण्ड अधिकारी ने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, भूपालसागर का रुख किया, जहां स्वच्छता मानकों की धज्जियां उड़ती मिलीं। विद्यालय परिसर और विशेषकर शौचालयों में पसरी गंदगी पर कड़ा रुख अपनाते हुए गगोरिया ने विद्यालय प्रशासन को हिदायत दी कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुविधा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि सफाई व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए उपखण्ड अधिकारी महेश गगोरिया ने कहा कि सरकारी संस्थानों में बुनियादी सुविधाओं और सुदृढ़ व्यवस्थाओं का होना अनिवार्य है। जर्जर भवनों और व्यवस्थागत कमियों को दूर कर बच्चों को एक सुरक्षित और बेहतर शैक्षिक वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

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