भूपालसागर क्षेत्र के लुणेरा ग्राम में जमीन की फर्जी तरीके से रजिस्ट्री कराने और धोखाधड़ी का एक सनसनीखेज मामला उजागर हुआ है, जिसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित बद्रीलाल जाट पिता माधवलाल जाट निवासी लुणेरा ने थानाधिकारी को प्रार्थना पत्र सौंपकर स्थानीय राजस्व अधिकारियों और अन्य व्यक्तियों पर मिलीभगत का सीधा आरोप लगाते हुए मामला दर्ज करने की गुहार लगाई है। प्रार्थी के अनुसार, उन्होंने वर्ष 2011 में ग्राम लुणेरा में कृषि भूमि खरीदी थी, जिसका नामान्तरण 2 अगस्त 2014 को उनके नाम राजस्व रिकॉर्ड में विधिवत दर्ज हो चुका था। आरोप है कि पीड़ित की अनुपस्थिति का लाभ उठाकर गत 12 फरवरी को कुछ भू-माफियाओं और राजस्व अधिकारियों ने सांठगांठ कर उसी जमीन का फर्जी विक्रय पत्र तैयार किया और उसे पंजीकृत करवा लिया।

शिकायती पत्र में पीड़ित ने नायब तहसीलदार ललित यादव, आरोपी बद्रीलाल पुत्र नगजीराम जाट, रतनी देवी पत्नी प्रकाश जाट, शैल सिंह पुत्र भगवान सिंह, रतनलाल पुत्र गणेश जाट तथा दस्तावेज लेखक अरविन्द कुमार दाधीच (निवासी पटोलिया) को मुख्य आरोपी बताते हुए इनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है। पीड़ित का यह भी आरोप है कि जब उसने इस पूरे प्रकरण की शिकायत वर्तमान तहसीलदार अपूर्व गौतम से की, तो उन्होंने प्रार्थना पत्र लेने तक से मना कर दिया। इसके अतिरिक्त, आरोपी दस्तावेज लेखक अरविन्द कुमार दाधीच द्वारा मामले को रफा-दफा करने के लिए पीड़ित पर अनैतिक दबाव बनाया जा रहा है।

बद्रीलाल जाट ने व्यथा सुनाते हुए बताया कि वह फर्जी पंजीयन निरस्त करवाने के लिए तहसील कार्यालय के चक्कर काट रहा है, लेकिन उसे यह कहकर लौटा दिया गया कि अब यह कार्य तहसील स्तर पर संभव नहीं है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि 13 बिस्वा जमीन के इस फर्जी पंजीयन के निरस्तीकरण की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? इस विवाद पर नायब तहसीलदार ललित यादव ने अनभिज्ञता जाहिर करते हुए कहा कि उन्हें प्रकरण की जानकारी नहीं है और पंजीयन के दौरान दस्तावेजों की जिम्मेदारी निष्पादनकर्ता एवं गवाहों की होती है। दूसरी ओर, सीआई भूपालसागर घेवरचन्द रेगर ने पुष्टि की है कि बद्रीलाल जाट के प्रार्थना पत्र पर ऑनलाइन परिवाद दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। यह मामला अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या प्रशासन दोषियों पर शिकंजा कस पाएगा।

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