भूपालसागर, चित्तौड़गढ़ (प्रातःकाल संवाददाता अरविंद गर्ग): भूपालसागर क्षेत्र में भक्ति और आस्था का प्रतीक दशामाता का पर्व शुक्रवार को महिलाओं द्वारा बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि पर महिलाओं ने अपने परिवार की खुशहाली और आर्थिक दशा सुधारने की कामना के साथ परंपरागत रूप से पूजन किया। नगर सहित ग्रामीण क्षेत्रों में उल्लास की लहर रही और महिलाओं ने व्रत की 10 कथाएं सुनीं।

पीपल पूजन हेतु उमड़ा आस्था का सैलाब

कस्बे में आज पीपल पूजन को लेकर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा, जहां सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक परिधानों में सज-धजकर और हाथों में पूजा की थाली लिए पूजन स्थलों पर पहुँचने लगीं। कस्बे के प्रमुख स्थानों पर पीपल के वृक्ष की पूजा के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखी गई। इस अवसर पर सामूहिक पूजन का भव्य आयोजन मुख्य रूप से नरसिंह बांके बिहारी मंदिर चौक, पशु चिकित्सालय परिसर, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर, विद्युत विभाग पावर हाउस परिसर और आशावरा माताजी मंदिर परिसर में किया गया, जहाँ महिलाओं ने विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की।

विधि-विधान से पूजा और मंगल कामना

पूजन के दौरान महिलाओं ने पीपल के वृक्ष को सूत का धागा लपेटकर 10 परिक्रमाएँ कीं और वृक्ष के तने पर कुमकुम व मेहंदी के छापे लगाए। मंगल गीतों के बीच महिलाओं ने दशामाता की विधि-विधान से पूजा अर्चना की और घर की "दशा" सुधारने व सुख-समृद्धि की मंगल कामना की।

पौराणिक कथा श्रवण और डोरा धारण

दशामाता व्रत के अंतिम दिन महिलाओं ने पीपल की छांव में बैठकर माता की 10 पौराणिक कहानियाँ सुनीं। इन कथाओं के माध्यम से नल-दमयंती के जीवन और दशामाता के आशीर्वाद के महत्व को बताया गया। कथा श्रवण के पश्चात महिलाओं ने गले में दशामाता का डोरा (10 गांठों वाला पवित्र धागा) धारण किया। मान्यता है कि यह डोरा वर्ष भर परिवार की विपत्तियों से रक्षा करता है।

Pratahkal Bureau

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