भूपालसागर: बाबुड़ी मंगरी पर बाहरी लोगों का अतिक्रमण, ग्रामीणों ने तहसीलदार को सौंपा ज्ञापन
चित्तौड़गढ़ के भूपालसागर में बाबुड़ी मंगरी पर बाहरी असामाजिक तत्वों के कब्जे से ग्रामीण परेशान, प्रधानमंत्री आवास योजना के पट्टेधारकों ने जताई नाराजगी।

भूपालसागर ग्राम पंचायत की बेशकीमती आबादी भूमि पर बाहरी लोगों द्वारा किए जा रहे सुनियोजित अतिक्रमण को लेकर क्षेत्र में भारी रोष व्याप्त है। सोमवार, 30 मार्च को आक्रोशित मोहल्लेवासियों ने तहसील कार्यालय पहुंचकर तहसीलदार अपूर्व गौतम को एक लिखित ज्ञापन सौंपा और सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की पुरजोर मांग की। मामले की गंभीरता और सार्वजनिक सुरक्षा को देखते हुए तहसीलदार ने तत्काल पंचायत समिति विकास अधिकारी को ज्ञापन प्रेषित कर अग्रिम दंडात्मक कार्यवाही सुनिश्चित करने का आग्रह किया है।
तहसीलदार को सौंपे गए ज्ञापन में मोहल्लेवासियों ने विस्तार से बताया कि जाशमा रोड स्थित बाबुड़ी मंगरी की रंगास्वामी बस्ती में राजसमन्द जिले के जुणदा निवासी बागरिया जाति के बाहरी लोगों ने अवैध रूप से निर्माण कर आबादी भूमि पर कब्जा जमा लिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि ये अतिक्रमी असामाजिक गतिविधियों में लिप्त हैं और आदतन अपराधी होने के साथ-साथ नशा करने के शौकीन हैं। बस्तीवासियों ने आशंका व्यक्त की है कि इन बाहरी तत्वों की उपस्थिति से भविष्य में गांव में किसी बड़ी अनहोनी या आपराधिक घटना की संभावना बनी रहती है, क्योंकि इनमें से कई व्यक्तियों पर पूर्व में भी आपराधिक मामले दर्ज हैं।
अतिक्रमण के इस खेल में एक गंभीर खुलासा यह भी हुआ है कि ये अतिक्रमी केवल भूमि पर काबिज ही नहीं हैं, बल्कि वे भूमि की अवैध खरीद-फरोख्त के कारोबार में भी संलिप्त हैं। जानकारी के अनुसार, ये लोग पहले भूमि पर कब्जा करते हैं और कुछ समय बीतने के बाद मोटी रकम लेकर अन्य लोगों को भूमि बेच देते हैं। बाबुड़ी मंगरी कस्बा उत्तर दिशा में स्थित होने के कारण प्रशासन की आवाजाही कम रहती है, जिसका लाभ उठाकर एक-एक व्यक्ति ने करीब डेढ़-डेढ़ बीघा भूमि पर कब्जा कर रखा है। प्रशासनिक अधिकारियों की नजरों से दूर यह अवैध कारोबार पिछले काफी समय से फल-फूल रहा है।
सबसे विडंबनापूर्ण स्थिति उन पात्र परिवारों की है जिनके पास ग्राम पंचायत द्वारा जारी वैध पट्टे तो हैं, लेकिन उनकी भूमि पर इन दबंग अतिक्रमियों का कब्जा है। वर्तमान में कई ग्रामीणों के 'प्रधानमंत्री आवास' स्वीकृत हो चुके हैं, किंतु अपनी ही पट्टेसुदा भूमि पर दूसरों का कब्जा होने के कारण वे अपने सपनों का घर बनाने में असमर्थ हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से गुहार लगाई है कि इन अवैध कब्जों को हटाकर पट्टेधारकों को उनकी भूमि वापस दिलाई जाए ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ धरातल पर दिख सके।

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