भूपालसागर।

राजस्थान सरकार द्वारा जारी पंचायत पुनर्गठन अधिसूचना ने भूपालसागर पंचायत समिति की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। वर्षों से स्थिर माने जाने वाले पंचायत सीमाओं के ढांचे में हुए इस बड़े बदलाव ने न केवल प्रशासनिक दृष्टि से क्षेत्र को नए सिरे से परिभाषित किया है, बल्कि आने वाले पंचायत चुनावों के समीकरण भी पूरी तरह उलझा दिए हैं। पुनर्गठन के बाद यहां पंचायतों की संख्या 18 से बढ़कर 20 हो गई है, जिससे राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का नया अध्याय शुरू होने वाला है।

अधिसूचना के अनुसार, आकोला पंचायत को पहले ही नगरपालिका में क्रमोन्नत किया जा चुका है, जिसके बाद भूपालसागर क्षेत्र में 18 पंचायतें बची थीं। अब सीमाओं के पुनर्निर्धारण के साथ दो नई ग्राम पंचायतों—मालीखेड़ा और जोयड़ा—का गठन किया गया है। यह बदलाव कई पुरानी पंचायतों के विभाजन और नए गांवों के संयोजन के माध्यम से किया गया है, जिसने जनप्रतिनिधियों और दावेदारों के राजनीतिक गणित को एक झटके में बदल दिया है।

मालीखेड़ा ग्राम पंचायत के गठन में उसरोल, कानाखेड़ा, निलोद और मुरला पंचायतों के कुछ गांवों को अलग कर नई इकाई बनाई गई है। विशेष रूप से कानाखेड़ा ग्राम पंचायत से ओडो का खेड़ा, गुलाबपुरा, सांवलिया खेड़ा और मालीखेड़ा गांव अलग होकर इस नई पंचायत का हिस्सा बने हैं। वहीं उसरोल से रूपपुरा उर्फ धन्नाखेड़ा को अलग करके कानाखेड़ा पंचायत में जोड़ा गया है, जिससे दोनों पंचायतों की सीमाएं अब नए स्वरूप में सामने आई हैं।

इसी प्रकार निलोद और मुरला ग्राम पंचायतों से जोयड़ा ग्राम पंचायत का निर्माण किया गया है। निलोद से जोयड़ा गांव को अलग किया गया जबकि मुरला से अमरपुरा और बड़वई गांवों को तोड़कर जोयड़ा पंचायत को सौंपा गया। इन तीन गांवों के विलय से यह नई पंचायत अस्तित्व में आई है, जो स्थानीय स्तर पर प्रशासनिक पुनर्गठन का महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है।

पुनर्गठन की इस प्रक्रिया में पारी ग्राम पंचायत से मुंडकटिया गांव को हटाकर पटोलिया पंचायत में जोड़ दिया गया है, जिससे इन दोनों पंचायतों की सीमाएं भी प्रभावित हुई हैं। इन निरंतर परिवर्तनों ने पूरे क्षेत्र में राजनीतिक चर्चा का नया दौर शुरू कर दिया है।

स्थानीय विश्लेषकों का मानना है कि नई पंचायतों के गठन से दो नए सरपंच, दो नए उपसरपंच और कई वार्ड पंच चुनकर आएंगे, जिससे चुनावी दौड़ और अधिक रोचक तथा प्रतिस्पर्धी बनेगी। कई पुराने नेताओं का प्रभाव क्षेत्र अब खंडित हो चुका है और उन्हें बदलते भू-राजनीतिक ढांचे के अनुरूप नई रणनीतियां तैयार करनी पड़ेंगी।

ग्रामीणों की राय में छोटी पंचायतों का गठन विकास कार्यों में तेजी और प्रशासनिक पहुंच के विस्तार की दिशा में सकारात्मक कदम है। अब पूरा भूपालसागर क्षेत्र इन परिवर्तनों के बाद होने वाले निकट भविष्य के पंचायत चुनावों को लेकर उत्सुक है, जहां नए समीकरण और नई चुनौतियां राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह बदलने जा रही हैं।

Pratahkal Bureau

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