भूपालसागर, 6 दिसम्बर। मेवाड़ के प्राचीन और प्रतिष्ठित शंखेश्वर 108 श्री करेड़ा पार्श्वनाथ जैन तीर्थ पर पोष दशम के पावन अवसर पर भव्य त्रिदिवसीय महोत्सव की शुरुआत आज साध्वीव्रंद के मंगल प्रवेश के साथ हुई। यह महोत्सव भगवान पार्श्वनाथ के जन्मकल्याणक एवं दीक्षा कल्याणक के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया है।

सुबह प्रातःकाल परम् पूज्य साध्वीवर्या अर्हद रेखा श्रीजी आदि ठाणा-4 ने जाशमा से विहार कर कोठारी वाटिका पहुँचना किया। स्थानीय जैन समाज के श्रद्धालुओं ने परंपरागत ढोल-नगाड़ों और मंगल निनादों के बीच उनका भव्य स्वागत किया। शोभायात्रा मुख्य बाजार मार्ग से होते हुए करेड़ा तीर्थ प्रांगण तक पहुँची, जहाँ उपस्थित समाजजनों ने साध्वीजी के प्रवेश को श्रद्धा और भक्ति के भाव से अभिनंदन किया।

इस अवसर पर साध्वीजी ने दो महत्वपूर्ण वचन दिए, जिन्होंने उपस्थित सभी श्रद्धालुओं के हृदय को स्पर्श किया:

“प्रभु का कल्याणक आत्मा का करे कल्याण, पुण्य का करे पोषण, कर्मों का करे शोषण।”

प्रवेश समारोह के पश्चात साध्वी अर्हद रेखा श्रीजी ने मंगलाचरण कर समाजजनों को तप, त्याग और साधना की ओर प्रेरित किया। समारोह में यह भी उल्लेखनीय रहा कि यह तीर्थ क्षेत्र का सबसे बड़ा और प्राचीन जैन तीर्थस्थल माना जाता है। यहाँ पोष दशमी के दिन वर्षों से सूर्य की सीधी किरण पार्श्वनाथ भगवान के मस्तक पर पड़ने का अद्भुत दृश्य देखा जाता है, जिसे महोत्सव की विधिवत शुरुआत के रूप में मनाया जाता है।

इस भव्य आयोजन ने न केवल जैन धर्मावलंबियों में उत्साह और श्रद्धा का संचार किया, बल्कि पूरे क्षेत्र में धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को भी नई ऊँचाई दी। त्रिदिवसीय महोत्सव के अगले दिनों में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, कथा वाचन और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, जो श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक और सांस्कृतिक अनुभव का माध्यम बनेंगे।

Pratahkal Bureau

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