भूपालसागर (चित्तौड़गढ़)। चित्तौड़गढ़ जिले के भूपालसागर उपखण्ड में प्रशासन और अतिक्रमणकारियों के बीच चूहे-बिल्ली का एक ऐसा खेल चल रहा है जिसने पूरे गांव का सुकून छीन लिया है। ग्राम पंचायत फलासिया के भूमलावास की खेड़ी में सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए एक अतिक्रमी ने न केवल रास्ते को अवरुद्ध कर रखा है, बल्कि प्रशासन की कार्रवाई को भी मजाक बनाकर रख दिया है। आलम यह है कि मौके पर पुलिस जाब्ता तैनात होते ही अतिक्रमण हट जाता है, लेकिन खाकी के जाते ही फिर से पत्थर और मिट्टी के ढेर सरकारी रास्ते पर अपनी जगह बना लेते हैं।

इस पूरे विवाद के केंद्र में खसरा नंबर 602 और 702 का करीब 20 फीट चौड़ा पुराना सरकारी रास्ता है। ग्रामीणों का आरोप है कि स्थानीय निवासी किशन लाल पुत्र हरिराम गाडरी ने इस महत्वपूर्ण रास्ते पर अवैध कब्जा जमा रखा है। ग्राम पंचायत द्वारा 6 लाख रुपये की लागत से निर्मित खुले बरामदे के समीप स्थित यह रास्ता खेतों तक पहुँचने का एकमात्र साधन है। किशन लाल की हठधर्मिता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राम पंचायत द्वारा कई बार कार्रवाई करने के बावजूद स्थिति जस की तस बनी हुई है।

इस अतिक्रमण का सबसे घातक प्रभाव गांव की स्वच्छता और स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। पीडब्ल्यूडी की मुख्य सड़क पर जलभराव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है क्योंकि अतिक्रमी ने नालियों के प्राकृतिक बहाव को मिट्टी डालकर अवरुद्ध कर दिया है। गंदा पानी सड़क पर जमा होने से कीचड़ का साम्राज्य फैला हुआ है, जो न केवल यातायात में बाधा बन रहा है बल्कि मच्छरों और घातक कीटाणुओं की शरणस्थली बन गया है। ग्रामीणों को अब डर सता रहा है कि यदि शीघ्र ही पानी की निकासी का स्थायी समाधान नहीं हुआ, तो गांव में कोई गंभीर महामारी पैर पसार सकती है।

फलासिया सरपंच नंदू देवी जाट ने इस विषय पर अपनी बेबसी जाहिर करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित व्यक्ति के पास मात्र 58 फीट का वैध पट्टा है, जबकि उसने उससे कहीं आगे जाकर सरकारी भूमि पर कब्जा किया हुआ है। सरपंच के अनुसार, प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में अतिक्रमी सहयोग का दिखावा करता है, परंतु अधिकारियों की पीठ मुड़ते ही पुनः अतिक्रमण कर लिया जाता है। ग्राम पंचायत की कार्रवाई अब केवल कागजों तक सिमटती नजर आ रही है और प्रशासन की इस चुप्पी ने ग्रामीणों के आक्रोश को बढ़ा दिया है।

थक-हारकर अब भूमलावास की खेड़ी के निवासियों ने उपखण्ड अधिकारी (SDM) की ओर उम्मीद भरी नजरों से देखना शुरू किया है। ग्रामीणों ने सामूहिक रूप से अपील की है कि इस मामले में अब कड़े एक्शन की आवश्यकता है ताकि सरकारी रास्ते को अतिक्रमण मुक्त कराया जा सके और सार्वजनिक निर्माण विभाग की सड़कों पर जमा कीचड़ से निजात मिल सके। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन इस ‘लुका-छिपी’ के खेल को खत्म कर ग्रामीणों को राहत दिला पाता है या फिर यह फाइल भी अन्य फाइलों की तरह ठंडे बस्ते में चली जाएगी।

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