18 वर्षों से नियमितीकरण की राह देख रहे शिक्षाकर्मियों ने सरकार से अनुभव गणना में राहत और स्थायी सेवा की मांग की है।

बेगूं में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक में पंचायत शिक्षकों और विद्यालय सहायकों ने अपने भविष्य को लेकर गहरा रोष व्यक्त किया है। पिछले 18 वर्षों से नियमितीकरण की राह देख रहे इन शिक्षाकर्मियों का धैर्य अब जवाब देने लगा है। बैठक के दौरान वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि लंबे समय से चली आ रही उनकी उपेक्षा अब और अधिक सहन नहीं की जाएगी। शिक्षा व्यवस्था की धुरी माने जाने वाले ये पंचायत शिक्षक, विद्यालय सहायक और ग्राम रोजगार सहायक अब सरकार से अपनी सेवाओं के पूर्ण सम्मान और स्थायीकरण की मांग को लेकर मुखर हो गए हैं।

बैठक में अनुभव गणना के तकनीकी पहलुओं पर विशेष जोर देते हुए यह मांग उठाई गई कि ग्राम रोजगार सहायक के रूप में बिताए गए एक वर्ष और पंचायत शिक्षक या विद्यालय सहायक के रूप में पूर्ण किए गए तीन वर्षों के कार्यकाल को जोड़कर कुल चार वर्ष का अनुभव माना जाए। वक्ताओं ने राज्य सरकार के बजट वर्ष 2025-26 के उस निर्णय की सराहना की, जिसमें अनुभव संबंधी शर्तों में दो वर्ष की छूट दी गई थी। साथ ही, उन्होंने एक स्वर में मांग की कि इसी नीति को वर्ष 2026-27 के बजट में भी निरंतरता के साथ लागू किया जाए, ताकि हजारों परिवारों को राहत मिल सके।

इस गंभीर स्थिति पर चिंता जताते हुए उपस्थित सदस्यों ने कहा कि दो दशक के करीब का समय बीत जाने के बाद भी समाधान का न निकलना प्रशासनिक उदासीनता को दर्शाता है। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि यदि राज्य सरकार ने उनकी मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक और शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो वे अपने अधिकारों की प्राप्ति के लिए व्यापक आंदोलन करने को विवश होंगे।

इस कार्यक्रम का संचालन संगठन के उपाध्यक्ष लाभचंद धाकड़ ने किया, जिन्होंने उपस्थित सभी सदस्यों को संगठन की आगामी गतिविधियों और संघर्ष की रूपरेखा से अवगत कराया। बैठक में हिम्मत सिंह भाटी, गोपाललाल धामंद, संजय कुमार टेलर, रमेशचंद्र धाकड़, दिनेश चंद्र शर्मा, बालूलाल धाकड़, रामलाल धाकड़, लाइलाल धाकड़, चतुर्भुज धाकड़, कैलाश चंद्र धाकड़, लादु लाल राठौड़, जगदीश रेगर, सुरेश चंद्र धाकड़ और भुरालाल धाकड़ सहित बड़ी संख्या में शिक्षक और सहायक उपस्थित रहे। सभी ने एकमत होकर संकल्प लिया कि जब तक नियमितीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक उनका संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

Pratahkal Newsroom

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