बेगूं: कड़ाके की ठंड में धारला के बच्चों को मिला वन विभाग का सुरक्षा कवच, मानवता की मिसाल पेश कर जीता सबका दिल
बेगूं के धारला विद्यालय में वन विभाग ने पेश की मानवता की मिसाल। वनपाल नारायण सिंह द्वारा शीतलहर से बचाव हेतु स्कूली बच्चों को जर्सी और टोपी का वितरण किया गया। प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार मीणा सहित ग्रामीणों ने सराहा वन विभाग का यह सामाजिक सरोकार। पढ़ें पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के संगम की यह विशेष रिपोर्ट।

बेगूं। जोगणियां माता क्षेत्र के दुर्गम इलाकों में जब शीतलहर अपना सितम ढा रही है, तब मानवता और सामाजिक सरोकार की एक ऐसी गर्माहट देखने को मिली जिसने न केवल स्कूली बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेरी, बल्कि समाज को एक नई दिशा भी दिखाई। बेगूं के धारला विद्यालय परिसर में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में वन विभाग ने खाकी के भीतर छिपी संवेदनशीलता का परिचय देते हुए विद्यार्थियों को सर्दी से बचाव के लिए सुरक्षा कवच प्रदान किया। यह आयोजन केवल एक वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि वन विभाग द्वारा समाज के प्रति अपनी अटूट जिम्मेदारी को निभाने का एक सशक्त संदेश सिद्ध हुआ।
इस पुनीत कार्य की पहल जोगणियां माता वन विभाग चौकी के वनपाल नारायण सिंह द्वारा की गई, जिन्होंने व्यक्तिगत रुचि लेते हुए विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों को कड़ाके की ठंड से बचाने के लिए जर्सी और टोपी का वितरण किया। जैसे ही बच्चों के हाथों में गरम वस्त्र आए, पूरा परिसर हर्षोल्लास से गूंज उठा। कार्यक्रम के दौरान वनरक्षक राजेंद्र सिंह और वन सुरक्षा प्रबंध समिति धारला के अध्यक्ष महेंद्र सिंह सोलंकी ने अपनी उपस्थिति से आयोजन की गरिमा बढ़ाई। साथ ही कोमल गुर्जर, मनोज गुर्जर और देवीलाल पुजारी जैसे स्थानीय प्रबुद्धजनों ने भी इस नेक कार्य में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
समारोह को संबोधित करते हुए अतिथियों ने शिक्षा और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर गहरा प्रकाश डाला। वक्ताओं ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि एक जागरूक नागरिक वही है जो अपनी शिक्षा के साथ-साथ अपने परिवेश और पर्यावरण के संरक्षण के प्रति भी सजग रहे। विद्यालय के प्रधानाध्यापक दिनेश कुमार मीणा ने वन विभाग के इस मानवीय दृष्टिकोण की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे प्रयास ग्रामीण अंचलों में शिक्षा के प्रति उत्साह जगाने में मील का पत्थर साबित होते हैं। इस अवसर पर विद्यालय का समस्त स्टाफ और बड़ी संख्या में ग्रामीण उपस्थित रहे, जिन्होंने एक स्वर में वन विभाग की इस पहल का स्वागत किया।
अंततः, धारला विद्यालय में आयोजित यह कार्यक्रम इस बात का जीवंत उदाहरण बन गया कि यदि सरकारी विभाग और समाज मिलकर कदम बढ़ाएं, तो संसाधनों के अभाव को सेवा के भाव से दूर किया जा सकता है। बच्चों को वितरित की गई ये जर्सियां और टोपियां केवल वस्त्र मात्र नहीं हैं, बल्कि यह उस विश्वास की प्रतीक हैं कि समाज का हर तबका उनकी प्रगति और स्वास्थ्य के लिए उनके साथ खड़ा है।

Pratahkal Bureau
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