सरकारी कर्मचारियों पर बढ़ते अत्यधिक काम के बोझ और मानसिक तनाव ने अब एक बड़े विरोध का रूप ले लिया है। बेगूं में पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षक संगठनों के प्रतिनिधियों ने अपनी जायज मांगों को लेकर हुंकार भरी है। राजकीय अवकाश के दिनों में भी लगातार नियमित शासकीय कार्य कराए जाने से आक्रोशित कर्मचारियों ने इस व्यवस्था पर पूर्ण रोक लगाने की मांग को लेकर उपखंड अधिकारी के नाम तहसीलदार बेगूं गोपाल जीनगर को एक संयुक्त ज्ञापन सौंपा है। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि उनकी जीवनशैली को तनावपूर्ण बनाने वाली इस व्यवस्था को नहीं बदला गया, तो वे आगामी समय में अवकाश के दिनों में होने वाले कार्यों का पूर्ण बहिष्कार करेंगे।

इस आधिकारिक ज्ञापन में कर्मचारियों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाते हुए बताया कि राज्य सरकार ने वर्ष 2008 से ही कर्मचारियों की कार्यक्षमता बढ़ाने तथा उन्हें आवश्यक शारीरिक एवं मानसिक विश्राम उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पांच दिवसीय कार्य व्यवस्था लागू की थी। इस नीतिगत निर्णय के बावजूद, पिछले तीन वर्षों से विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों, शिविरों, चौपालों एवं अभियानों के नाम पर लगातार शनिवार, रविवार एवं अन्य राजकीय अवकाशों में भी कर्मचारियों की ड्यूटियां लगाई जा रही हैं। सरकार की इस कार्यप्रणाली के कारण कर्मचारियों को मिलने वाला साप्ताहिक विश्राम पूरी तरह समाप्त हो चुका है।

संगठनों के प्रतिनिधियों का कहना है कि लगातार अवकाश के दिनों में भी कार्य लेने से कर्मचारियों के मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य पर अत्यंत प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इसके साथ ही, बाहरी जिलों से आकर यहां पदस्थापित हुए कर्मचारी लंबे समय से अपने गृह जिलों में रह रहे परिवारों से नहीं मिल पा रहे हैं, जिससे उनके पारिवारिक एवं सामाजिक दायित्व भी पूरी तरह प्रभावित हो रहे हैं। ज्ञापन में विशेष रूप से उल्लेख किया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कार्यरत पटवारी, ग्राम विकास अधिकारी एवं कृषि पर्यवेक्षक ही राज्य एवं केंद्र सरकार की समस्त जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर लागू करने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, लेकिन लगातार बिना किसी अवकाश के कार्य करने से उनकी जीवनशैली अत्यधिक तनावपूर्ण और दुरूह होती जा रही है।

इस गंभीर स्थिति को देखते हुए तीनों संगठनों ने संयुक्त रूप से एक बड़ा और कड़ा निर्णय लिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में शनिवार, रविवार एवं किसी भी राजकीय अवकाश के दिनों में आपातकालीन सेवाओं को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार का विभागीय कार्य नहीं किया जाएगा। कर्मचारियों ने पुरजोर मांग की है कि अत्यंत आपातकालीन एवं संकटकालीन परिस्थितियों को छोड़कर अवकाश के दिनों में किसी भी तरह की बैठक, ग्राम सभा, चौपाल, शिविर एवं निरीक्षण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन पूरी तरह बंद किया जाए। ज्ञापन के माध्यम से कर्मचारियों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी दी है कि निर्धारित तिथि के बाद अवकाश के दिनों में जारी होने वाले कार्य संबंधी किसी भी आदेश को वे स्वीकार नहीं करेंगे तथा ऐसे गैर-आपातकालीन कार्यों में कोई भी कर्मचारी उपस्थित नहीं रहेगा। कर्मचारियों का यह संयुक्त कदम आने वाले दिनों में प्रशासनिक कार्यप्रणाली को बड़े पैमाने पर प्रभावित कर सकता है।

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