बेगूं में स्मैक और अफीम का नशा बढ़ा, पुलिस कार्रवाई पर उठे सवाल
विधायक सुरेश धाकड़ की चेतावनी के बाद भी पुलिस द्वारा नशा तस्करों के बड़े नेटवर्क को न पकड़ पाने से स्थानीय जनता में आक्रोश व्याप्त है।

चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं क्षेत्र में बढ़ते स्मैक और अफीम के अवैध कारोबार की जांच करती स्थानीय थाना पुलिस।
बेगूं। चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं नगर सहित आसपास के संपूर्ण क्षेत्रों में पिछले कुछ महीनों से स्मैक और अफीम के बढ़ते घातक नशे को लेकर स्थानीय आमजन में चिंता और आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है। क्षेत्र के युवाओं के तेजी से नशे की इस जानलेवा गिरफ्त में आने के साथ-साथ इलाके में संचालित अवैध स्पा सेंटरों की आड़ में अन्य संदिग्ध गतिविधियों के पनपने की चर्चाएं भी संपूर्ण क्षेत्र में लगातार जोरों पर हैं। जमीनी हकीकत से जुड़े इस बेहद संवेदनशील मुद्दे को तब और अधिक बल मिला, जब क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ ने सार्वजनिक मंचों से कई बार बेगूं में बढ़ते नशे के खिलाफ खुलकर अपनी गहरी चिंता व्यक्त की।
क्षेत्रीय विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ ने बीते पांच महीनों के कार्यकाल के दौरान करीब सात अलग-अलग जनसभाओं और सामाजिक कार्यक्रमों में आम लोगों से नशा मुक्ति का पुरजोर आह्वान किया है। उन्होंने क्षेत्र में स्मैक और अफीम के लगातार बढ़ते अवैध कारोबार का विशेष रूप से उल्लेख करते हुए स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को विशेष अभियान चलाने तथा तमाम अवैध गतिविधियों पर तत्काल पूर्ण रोक लगाने के कड़े निर्देश भी जारी किए। इसके बावजूद धरातल पर अब तक स्थानीय पुलिस प्रशासन की ओर से किसी भी बड़े ड्रग नेटवर्क या अंतरराज्यीय तस्करी गिरोह के खिलाफ कोई ठोस और प्रभावी कार्रवाई खुलकर सामने नहीं आई है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर लगातार सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
इस पूरे मामले में प्रशासनिक और कानूनी आंकड़ों की बात करें तो थानाधिकारी कमलचंद मीणा के अनुसार, पुलिस द्वारा पिछले दो महीनों के भीतर कुल 22 संदिग्ध नशेड़ियों को पकड़ा जरूर गया, लेकिन पकड़े गए इन संदिग्धों के पास से मौके पर स्मैक बरामद नहीं होने के कारण पुलिस द्वारा अन्य वैकल्पिक मामलों के तहत कानूनी कार्रवाई की गई। पुलिस ने इस दौरान महज एक आरोपी को मात्र 2 ग्राम स्मैक के साथ गिरफ्तार करने का दावा किया है। थानाधिकारी का कहना है कि क्षेत्र में सक्रिय नशे की इस पूरी सप्लाई चेन तक पहुंचने के लिए संदिग्धों से लगातार पूछताछ और मामले की गहन जांच जारी है। वहीं दूसरी ओर, क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध स्पा सेंटरों के लाइसेंस और वहां संचालित होने वाली संदिग्ध गतिविधियों को लेकर थानाधिकारी (एसएचओ) ने पूरी तरह अनभिज्ञता जताते हुए जानकारी नहीं होने की बात कही है।
आमतौर पर फिल्मों और वास्तविक जीवन के कई मामलों में जनप्रतिनिधियों पर ड्रग्स माफियाओं को राजनीतिक संरक्षण देने के आरोप देश और प्रदेश में लगातार लगते रहे हैं, लेकिन इन सबके उलट बेगूं विधायक डॉ. सुरेश धाकड़ लगातार सार्वजनिक मंचों से इस नशे के खिलाफ आर-पार के अभियान चलाने की बात करते नजर आते हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक वोट बैंक की जरा भी परवाह किए बिना समाज में व्यापक जागरूकता लाने और अपराधियों पर सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया है, जिसकी चर्चा अब पूरे क्षेत्र में जोरों पर है।
बेगूं क्षेत्र में लगातार बढ़ते इस नशे के काले कारोबार पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केवल औपचारिक और कागजी कार्रवाई को पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। वर्तमान में बेहद आवश्यकता इस बात की है कि पुलिस प्रशासन पूरी गंभीरता, संवेदनशीलता और तत्परता दिखाते हुए नशा तस्करों के मुख्य आकाओं तक पहुंचे तथा क्षेत्र में लगातार सघन धरपकड़ अभियान चलाए। इसके साथ ही इस सामाजिक बुराई को जड़ से मिटाने के लिए स्थानीय सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और जागरूक नागरिकों को भी जिम्मेदारी के साथ आगे आना होगा। क्षेत्र में व्यापक जनजागरण अभियान, नशा मुक्ति शिविरों का आयोजन, भटके हुए युवाओं की उचित काउंसलिंग और पारिवारिक स्तर पर निरंतर संवाद जैसे जमीनी प्रयास ही इस गंभीर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में सबसे प्रभावी कदम साबित हो सकते हैं। समाज और प्रशासन के इसी संयुक्त, ईमानदार और समन्वित प्रयासों से ही बेगूं के युवाओं को नशे की इस भयानक गिरफ्त से सुरक्षित बचाया जा सकता है।

