बेगूं: तकनीकी खामियों की भेंट चढ़ी डीसीएस गिरदावरी, पटवारियों ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर खोला मोर्चा
बेगूं में तकनीकी खामियों के कारण डीसीएस गिरदावरी कार्य ठप हो गया है। राज खसरा एप्प में आ रही समस्याओं और उत्पादन भरने की अनिवार्यता के विरोध में अध्यक्ष अंकित शर्मा व पटवार संघ ने एसडीएम को ज्ञापन सौंपकर समाधान की मांग की है। जानिए कैसे तकनीकी खराबी और प्रशासनिक दबाव के बीच पटवारियों का काम प्रभावित हो रहा है और उनकी प्रमुख मांगें क्या हैं।

बेगूं। राजस्थान के राजस्व विभाग द्वारा आधुनिकता के दावे के साथ शुरू की गई डिजिटल क्रॉप सर्वे (DCS) गिरदावरी वर्तमान में पटवारियों के लिए गले की फांस बनती नजर आ रही है। रबी संवत 2082 की गिरदावरी का आगाज़ हुए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन 'राज खसरा गिरदावरी' और 'राज किसान गिरदावरी' एप्प के तकनीकी दलदल में फंसने के कारण धरातल पर काम पूरी तरह ठप पड़ा है। इस गंभीर संकट को लेकर बेगूं तहसील के पटवारियों ने एकजुट होकर उपखंड अधिकारी (एसडीएम) को ज्ञापन सौंपा और प्रशासन के खिलाफ गहरा रोष व्यक्त किया।
अभियान की शुरुआत 1 जनवरी 2026 से हो चुकी है, लेकिन पटवारियों का कहना है कि एप्प में डेटा सबमिट करने के दौरान लगातार "कुछ त्रुटि है, कृपया कुछ समय बाद प्रयास करें" का संदेश प्रदर्शित हो रहा है। इसके चलते अब तक बोए गए खसरों की प्रविष्टि करना भी नामुमकिन साबित हो रहा है। विडंबना यह है कि तकनीकी बाधाओं के बावजूद उच्च अधिकारियों द्वारा पटवारियों पर कार्य पूर्ण करने का अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। पटवार संघ ने दोटूक शब्दों में मांग की है कि गिरदावरी की समय सीमा की गणना उसी दिन से की जाए, जिस दिन से एप्प निर्बाध रूप से चलना शुरू होगा।
ज्ञापन में एक और व्यावहारिक समस्या का उल्लेख किया गया है, जो सीधे तौर पर किसानों और सरकार के आंकड़ों से जुड़ी है। इस बार एप्प में फसल के उत्पादन का विवरण भरने की अनिवार्यता लागू की गई है, जबकि वर्तमान में फसलें 'पीपू' अवस्था में हैं। इस प्रारंभिक चरण में उत्पादन का सटीक अनुमान लगाना न केवल कठिन है बल्कि तर्कहीन भी है। पटवारियों का तर्क है कि यदि भविष्य में प्राकृतिक आपदा से फसल खराब होती है, तो वर्तमान में भरा गया उत्पादन डेटा विवाद का कारण बनेगा, अतः इस बाध्यता को तुरंत हटाया जाना चाहिए। इसके साथ ही, वीसी में दिए गए निर्देशों के विपरीत एप्प में 'निल गिरदावरी' (बिना फसल वाले खसरे) के लिए भी लोकेशन की अनिवार्यता आ रही है, जिसने सर्वेयरों के सामने नई मुसीबत खड़ी कर दी है।
तहसील के कई क्षेत्रों जैसे काटुन्दा, बलवंत नगर, गोविंदपुरा, बोरबाबढ़ी, गलियां बावड़ी, रावड़ा, हरिपुरा, बागपुरा, परवारी, बड़ी अनोपपुरा और साहिब क्षेत्र में नक्शों के ओवरलैप होने की समस्या इतनी विकट है कि वहां काम शुरू ही नहीं हो पाया है। साथ ही, राज खसरा गिरदावरी एप्प पर सर्वेयरों को खसरे आवंटित न होना भी एक बड़ी तकनीकी चूक बनकर उभरी है। पटवारियों ने ओबीसी सर्वे में ड्यूटी न लगाने की भी अपील की है, क्योंकि वे पहले से ही सातवीं लघु सिंचाई गणना और समय-संवेदनशील गिरदावरी कार्यों में व्यस्त हैं।
इस विरोध प्रदर्शन के दौरान राजस्व मंडल से यह भी पुरजोर मांग की गई कि बैच 2025 की नई नियुक्तियों से पहले, काफी समय से लंबित अंतरजिला स्थानांतरणों पर लगा प्रतिबंध हटाया जाए ताकि लंबे समय से प्रतीक्षारत कार्मिकों को राहत मिल सके। ज्ञापन सौंपने के दौरान पटवार संघ के अध्यक्ष अंकित शर्मा, उपाध्यक्ष संतोष गुर्जर, और मीडिया प्रभारी अनुसूया के नेतृत्व में पटवारी मनोज धाकड़, कालू लाल मीणा, गौरव मिश्रा तथा निशा बेरवा सहित समस्त पटवार संघ उपस्थित रहा। पटवारियों की इस चेतावनी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि जल्द ही तकनीकी खामियों को दूर कर कार्यप्रणाली को सुगम नहीं बनाया गया, तो रबी फसलों का यह महत्वपूर्ण सरकारी आंकड़ा अधूरा रह सकता है।

Pratahkal Bureau
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