बेगूं (चित्तौड़गढ़): माधोपुर में 50 बीघा सरकारी चरनोट भूमि पर भू-माफियाओं का पंजा, मवेशियों के निवाले पर संकट
चित्तौड़गढ़ के बेगूं में 50 बीघा सरकारी चरनोट भूमि पर अवैध कब्जे से मवेशियों के लिए चारे का संकट खड़ा हो गया है। माधोपुर ग्रामीणों ने एसडीएम अंकित सामरिया को ज्ञापन सौंपकर राजनीतिक रसूखदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण और अवैध खनन पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। जानिए क्या है पूरा मामला और क्यों बना है तनाव।

चित्तौड़गढ़ जिले की बेगूं तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत माधोपुर में सरकारी आरक्षित चरनोट भूमि पर अवैध कब्जे का एक गंभीर मामला गर्माता जा रहा है। यहां करीब 50 बीघा चारागाह भूमि पर राजनीतिक रसूखदारों द्वारा किए गए अतिक्रमण ने न केवल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा दिए हैं, बल्कि गांव के मवेशियों के सामने जीवन-मरण का संकट भी खड़ा कर दिया है। दशकों से गाय, भैंस और बकरियों के चरागाह के रूप में उपयोग में आने वाली इस भूमि पर अब पत्थरों के ढेर और जेसीबी मशीनों का शोर सुनाई दे रहा है।
ग्रामीणों द्वारा उपखण्ड अधिकारी अंकित सामरिया को सौंपे गए ज्ञापन के अनुसार, मौजा माधोपुर के आराजी संख्या 381, 641/365 एवं 529/115 की बेशकीमती भूमि पर गांव के ही कुछ प्रभावशाली लोगों ने अवैध रूप से कब्जा जमा लिया है। यह अतिक्रमण केवल जमीन घेरने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि यहां बड़े पैमाने पर प्रकृति का दोहन भी किया जा रहा है। आरोप है कि अतिक्रमणकारी जेसीबी मशीनों के जरिए अवैध रूप से मिट्टी का खनन कर रहे हैं और उसे ऊंचे दामों पर बेचकर अवैध लाभ कमा रहे हैं। इस प्रक्रिया में वहां मौजूद हरे-भरे पेड़-पौधों को बेरहमी से उखाड़कर भूमि को समतल किया जा रहा है, जिससे पर्यावरण को भी अपूरणीय क्षति पहुँच रही है।
इस पूरे प्रकरण में ग्रामीणों का आक्रोश प्रशासन की शिथिलता को लेकर अधिक है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब एक वर्ष पूर्व भी इस संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया था, लेकिन ठोस कार्रवाई के अभाव में अतिक्रमणकारियों के हौसले बुलंद होते गए। आज स्थिति यह है कि चारागाह की एक इंच भूमि भी सुरक्षित नहीं बची है, जिससे बेजुबान जानवरों के लिए चारे का गंभीर संकट पैदा हो गया है। ग्रामीणों ने उपखण्ड अधिकारी अंकित सामरिया से गुहार लगाई है कि तहसीलदार और पुलिस जाप्ते की उपस्थिति में इस अवैध कब्जे को तुरंत ध्वस्त किया जाए।
यह मामला अब केवल जमीन के विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह गांव की शांति व्यवस्था और पशुधन के संरक्षण का मुद्दा बन चुका है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई नहीं की गई और चारागाह को मुक्त नहीं कराया गया, तो गांव में जन-आक्रोश की स्थिति और विकट हो सकती है। अब सबकी नजरें प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या वह भू-माफियाओं के चंगुल से गौ माता की इस भूमि को मुक्त करा पाता है या नहीं।

Pratahkal Bureau
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