चित्तौड़गढ़ जिले के बेगूं ब्लॉक में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाने वाली आशा कार्यकर्ताओं ने सोमवार से पूर्णतः कार्य बहिष्कार शुरू कर दिया है। आशा कार्यकर्ताओं का कहना है कि पीटीसीएस (PTCS) के भुगतान में किए गए संशोधन से उन्हें भारी आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है और इस विसंगति के कारण वे मानसिक रूप से भी बेहद परेशान हैं।

ज्ञापन के बाद भी समाधान नहीं

आशा कार्यकर्ताओं ने इस विरोध के दौरान बताया कि "इससे पहले भी चित्तौड़गढ़ जिले की आशाओं द्वारा अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन दिया गया था, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस समाधान नहीं किया गया।" इसी अनदेखी के परिणामस्वरूप कार्यकर्ताओं ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आशाओं की मुख्य मांग है कि उनका भुगतान एकमुश्त किया जाए तथा उनके मानदेय में बढ़ोतरी की जाए।

अनिश्चितकालीन हड़ताल की घोषणा

इन मांगों को लेकर आशा कार्यकर्ताओं ने सोमवार, 9 मार्च 2026 से कार्य बहिष्कार शुरू करने की आधिकारिक घोषणा कर दी है। कार्यकर्ताओं ने कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट कर दिया है कि "जब तक उनकी मांगों को स्वीकार नहीं किया जाता, तब तक वे कोई कार्य नहीं करेंगी।" आशा कार्यकर्ताओं के इस कदम से क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रतिकूल असर पड़ने की गंभीर संभावना जताई जा रही है।

प्रशासनिक अधिकारियों को सौंपा मांग पत्र

इस विरोध प्रदर्शन के क्रम में आशा कार्यकर्ताओं ने उपखंड अधिकारी अंकित समरिया को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा। इसके साथ ही, खंड मुख्य चिकित्सा अधिकारी ऋतुराज कृष्णिया को भी ज्ञापन देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया गया है। कार्यकर्ता अब सरकार की ओर से किसी सकारात्मक पहल का इंतजार कर रही हैं।

Pratahkal Bureau

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