कृषि कार्मिकों का धरना, मांगों पर समाधान न मिलने पर मुख्यमंत्री को ज्ञापन
कृषि मैपर ऐप के सरलीकरण और लंबित मानदेय भुगतान सहित विभिन्न मांगों को लेकर उप जिला कृषि कार्यालय पर एक दिवसीय प्रदर्शन किया गया।

चित्तौड़गढ़ के बेगूं में गुरुवार को उप जिला कृषि कार्यालय के बाहर विभिन्न विभागीय समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर एक दिवसीय धरने पर बैठे कृषि पर्यवेक्षक और कार्मिक।
बेगूं में बुधवार को कृषि पर्यवेक्षक संयुक्त समन्वय समिति के आह्वान पर प्रदेशभर के उप जिला कृषि कार्यालयों में कृषि कार्मिकों ने एक दिवसीय धरना देकर अपनी विभिन्न समस्याओं के समाधान की मांग उठाई। धरने के दौरान कार्मिकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन प्रेषित करते हुए विभागीय कार्यों में आ रही बाधाओं के शीघ्र निराकरण और लंबित मांगों पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
ज्ञापन में कृषि कार्मिकों ने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा कृषि मैपर ऐप पर कार्य करने के लिए बाध्य किया जा रहा है, जबकि वर्तमान स्वरूप में ऐप पर प्रभावी कार्य करना संभव नहीं है। कार्मिकों ने बताया कि पूर्व में भी सक्षम अधिकारियों को इस समस्या से अवगत कराया गया था, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ है। उन्होंने ऐप के सरलीकरण और अपग्रेडेशन की मांग की।
कार्मिकों ने यह भी कहा कि एफपीओ, कृषि सखी, सीआरपी एवं एलआरपी को आवंटित कार्यों का अतिरिक्त दबाव कृषि पर्यवेक्षकों पर डाला जा रहा है, जबकि इन कार्यों का भुगतान संबंधित संस्थाओं और कार्मिकों को किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट मांग रखी कि विभागीय कार्य सीधे कृषि पर्यवेक्षकों से ही कराए जाएं तथा इसके लिए आवश्यक संसाधन और इंटरनेट सुविधा उपलब्ध कराई जाए।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि विभागीय लक्ष्यों की पूर्ति के बावजूद योजनाओं के तहत किसानों को अनुदान राशि का समय पर भुगतान नहीं होने से किसानों के बीच उनकी छवि प्रभावित होती है। ऐसे में सभी योजनाओं में अनुदानों का समयबद्ध भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई।
कृषि कार्मिकों ने बताया कि वे अधिकांश विभागीय कार्य अपने निजी संसाधनों से संपादित कर रहे हैं। उन्होंने राजकीय अवकाश, शनिवार एवं रविवार को कार्य कराने की स्थिति में नियमानुसार क्षतिपूर्ति अवकाश देने की भी मांग उठाई। इसके साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत राजस्व फसल कटाई प्रयोगों के लंबित मानदेय भुगतान हेतु बजट उपलब्ध कराने की मांग भी की गई।
इसके अलावा हरियालो राजस्थान अभियान के तहत 300 से 400 पौधे लगाने के लक्ष्य पर भी कार्मिकों ने बजट उपलब्ध कराने की आवश्यकता जताई। उनका कहना था कि पौधों की खरीद, परिवहन और गड्ढों की खुदाई जैसी व्यवस्थाओं के अभाव में लक्ष्य पूरा करना कठिन है, और यदि बजट उपलब्ध नहीं कराया गया तो इसकी जिम्मेदारी विभाग की होगी।
धरना प्रदर्शन के समापन पर कृषि कार्मिकों ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन भेजते हुए सभी लंबित समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि मांगों पर कार्रवाई नहीं की गई तो आंदोलन को आने वाले दिनों में और अधिक व्यापक रूप दिया जा सकता है, जिससे विभागीय कार्य व्यवस्था पर असर पड़ने की संभावना है।

Pratahkal Bureau
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