बेगूँ: काटुन्दा में सरकारी भूमि पर प्रशासन का पीला पंजा, अतिक्रमण मुक्त होंगे आराजी नंबर 1248 और 1249
बेगूँ के ग्राम काटुन्दा में आज दोपहर 2 बजे प्रशासन बड़ी कार्रवाई करते हुए आराजी नंबर 1248 व 1249 की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाएगा। तहसीलदार गोपाल जीनगर के नेतृत्व में गठित दल कैलाशचन्द्र धाकड़ द्वारा किए गए अवैध कब्जे को मुक्त कराएगा। राजस्व विभाग की इस सख्त कार्रवाई से क्षेत्र के अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया है।

काटुन्दा (बेगूँ)। सरकारी भूमि को अतिक्रमण मुक्त करने के अभियान के तहत आज प्रशासन एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम देने जा रहा है। ग्राम काटुन्दा में लंबे समय से शासकीय भूमि पर काबिज अतिक्रमणकारियों के खिलाफ सख्त रुख अख्तियार करते हुए राजस्व विभाग ने कमर कस ली है। पटवार हल्का काटुन्दा के अंतर्गत आने वाली बेशकीमती आराजी नंबर 1248 और 1249 की भूमि पर आज दोपहर 2 बजे प्रशासन का भारी अमला पहुंचेगा और अवैध निर्माण व कब्जे को ध्वस्त करने की प्रक्रिया शुरू करेगा।
इस पूरे प्रकरण की जड़ें रूपपुरा निवासी कैलाशचन्द्र पिता देवीलाल धाकड़ द्वारा किए गए अवैध कब्जे से जुड़ी हैं। शासकीय रिकॉर्ड के अनुसार, आराजी नंबर 1248 (रकबा 0.02 हेक्टेयर) और आराजी नंबर 1249 (रकबा 0.05 हेक्टेयर) की भूमि पर कैलाशचन्द्र ने अनधिकृत रूप से कब्जा कर रखा था। बार-बार के निर्देशों के बावजूद भूमि रिक्त न होने की स्थिति में प्रशासन ने अब बलपूर्वक अतिक्रमण हटाने का निर्णय लिया है। इस कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में हलचल तेज है और प्रशासनिक सक्रियता ने भू-माफियाओं के बीच कड़ा संदेश दिया है।
प्रशासनिक स्तर पर इस जटिल कार्रवाई को सुचारू रूप से संपन्न करने के लिए एक विशेष कार्यदल का गठन किया गया है। अभियान का नेतृत्व स्वयं तहसीलदार गोपाल जीनगर और नायब तहसीलदार विष्णुलाल यादव करेंगे। इनकी निगरानी में आज 8 जनवरी 2026 को दोपहर ठीक 2 बजे मौके पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। राजस्व दल में काटुन्दा के भू-अभिलेख निरीक्षक तुलसीराम मीणा, स्थानीय पटवारी अंकित शर्मा और बेगूँ के पटवारी कमलेश धाकड़ को शामिल किया गया है। यह दल सुनिश्चित करेगा कि सरकारी भूमि का एक-एक इंच हिस्सा पुनः शासन के अधीन आए।
प्रशासन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सरकारी संपत्तियों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। तहसीलदार के नेतृत्व में गठित यह दल नियमानुसार और शांतिपूर्ण ढंग से अपनी कार्रवाई पूरी करेगा। सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर आवश्यक राजस्व अमला और जाब्ता मौजूद रहेगा। यह कार्रवाई न केवल सरकारी भूमि को बहाल करने की एक प्रक्रिया है, बल्कि उन लोगों के लिए एक कड़ा सबक भी है जो सार्वजनिक संपत्तियों को अपनी निजी जागीर समझ बैठते हैं।

Pratahkal Bureau
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