बस्सी में गूंजा बाल विवाह मुक्त जिला बनाने का शंखनाद: देवनारायण जयंती पर हजारों श्रद्धालुओं ने ली कुप्रथा मिटाने की शपथ
चित्तौड़गढ़ के बस्सी में देवनारायण जयंती पर केलझर बालाजी मंदिर में उमड़े हजारों श्रद्धालुओं ने विधायक चंद्रभान सिंह आक्या की उपस्थिति में बाल विवाह मुक्त जिला बनाने की ऐतिहासिक शपथ ली। भगवती सेवा संस्थान और प्रशासनिक अधिकारियों की इस पहल का उद्देश्य समाज से बाल विवाह जैसी कुप्रथा को जड़ से खत्म करना है। जानिए कैसे एक धार्मिक आयोजन बना सामाजिक परिवर्तन का गवाह।

बस्सी/चित्तौड़गढ़। राजस्थान की वीर धरा पर जहां भक्ति और शक्ति का संगम होता है, वहीं अब एक सामाजिक कुप्रथा के विरुद्ध निर्णायक जंग की शुरुआत हो चुकी है। बस्सी क्षेत्र के ऐतिहासिक केलझर बालाजी मंदिर परिसर में देवनारायण जयंती के पावन अवसर पर उमड़े जनसैलाब ने भगवान की साक्षी में यह संकल्प लिया कि वे समाज के माथे पर लगे बाल विवाह के कलंक को सदा के लिए मिटा देंगे। भक्ति भाव से सराबोर इस वातावरण में जब हजारों हाथ एक साथ 'बाल विवाह निषेध' की शपथ के लिए उठे, तो वहां मौजूद हर शख्स इस बात का गवाह बना कि अब जिले की तकदीर और तस्वीर दोनों बदलने वाली है।
इस गरिमामयी कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित विधायक चंद्रभान सिंह आक्या ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए इसे एक सराहनीय और ऐतिहासिक पहल करार दिया। उन्होंने जोर देकर कहा कि जिले को बाल विवाह मुक्त बनाना केवल प्रशासन का दायित्व नहीं है, बल्कि इसके लिए हर आम नागरिक को सजग प्रहरी बनकर अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करना होगा। विधायक ने स्पष्ट किया कि जब धार्मिक मंचों से सामाजिक सुधार की आवाज उठती है, तो उसका प्रभाव गहरा और दूरगामी होता है।
भगवती सेवा एवं शिक्षण संस्थान के अध्यक्ष रामगोपाल ओझा ने आयोजन की सफलता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि श्रद्धा और जागरूकता के इस अनूठे मेल ने जन-जन तक यह संदेश पहुंचाया है कि अबोध बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस महाभियान में भूमि विकास बैंक के पूर्व चेयरमैन कमलेश पुरोहित, पूर्व प्रधान देवेन्द्र कंवर, जिला मंत्री सीपी नामधरानी, और पूर्व पार्षद शैलेंद्र झंवर ने भी अपनी सक्रिय सहभागिता दर्ज कराई।
प्रशासनिक और सामाजिक स्तर पर इस मुहिम को मजबूती देने के लिए बाल अधिकारिता विभाग के सहायक निदेशक ओम प्रकाश तोषनीवाल, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद दशोरा, और उपनिदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता जितेंद्र गढ़वाल ने भी अपनी उपस्थिति से जनता का मनोबल बढ़ाया। कार्यक्रम में गोपाल चौबे, अनिल सुखवाल, वीणा दशोरा, इन्दिरा सुखवाल, गौरव त्यागी, प्रदीप लढ्ढा, लोकेश सोनी, ज्योतिष पुरोहित, महावीर शर्मा, वैभव ओझा और समाजसेवी संजय झंवर सहित कई गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
अधिकारियों ने कानूनी और सामाजिक पहलुओं पर चर्चा करते हुए बताया कि बाल विवाह न केवल एक अपराध है, बल्कि यह बच्चों के विकास और स्वास्थ्य के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। केलझर बालाजी मंदिर के प्रांगण से उठी यह शपथ अब जिले के गांव-गांव और ढाणी-ढाणी तक एक मशाल बनकर पहुंचेगी। कार्यक्रम का समापन इस विश्वास के साथ हुआ कि श्रद्धा के केंद्र से शुरू हुई यह जागरूकता की लहर चित्तौड़गढ़ जिले को बाल विवाह की बेड़ियों से मुक्त कर एक नई सामाजिक चेतना का सूत्रपात करेगी।

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