बस्सी। (प्रातकाल संवाददाता) समीपवर्ती आछोड़ा गांव के समीप सड़क पर घूमते मिले 10 वर्षीय मासूम बच्चे को लेकर ग्रामीण और होमगार्ड थाने पहुंचे, लेकिन थाने में मौजूद एएसआई ने उन्हें मौके से भगा दिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस अब बच्चे की तलाश में जुटी है। सोमवार को चाइल्ड केयर के प्रतिनिधि बस्सी पहुंचे और बच्चे को खोजने में जुट गए।

थाने से सही जवाब नहीं मिलने के बाद अब बच्चे को बैंक ऑफ बड़ौदा और रोडवेज बस स्टैंड के समीप खोजे जाने की खबर सामने आई है। पुलिस द्वारा भी बच्चे की तलाश की जा रही है। बालक ने अपने आप को बारां जिले का रहने वाला बताया था।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस एवं चाइल्ड टीम बच्चे की तलाश कर रही है। वीडियो के अनुसार, बच्चों को थाने ले जाने और बातचीत करने से पहले ही एएसआई ने मौके से भगा दिया। मोबाइल में वीडियो बना रहे युवक से वीडियो बंद करने की बात कहते हुए उसे भी रवाना कर दिया गया। वीडियो में एएसआई वर्दी पर बेल्ट लगाए बिना बैठे दिखाई दे रहे हैं और उन्होंने टोपी भी नहीं लगा रखी थी। वे ड्यूटी पर थे या डीओ थे, यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है। सवाल यह है कि मासूम बच्चे का अब तक कोई सुराग नहीं लगा है।

मददगारों से ऐसा सलूक, फिर कौन आएगा आगे— एएसआई ने मददगारों के साथ ऐसा सलूक किया कि पहले ही लोग ऐसे मामलों में आगे आने से कतराते हैं। थाने में इस तरह का व्यवहार देखकर लोगों में डर का माहौल बनता है, जिससे लोग मदद के लिए आगे नहीं आ पाते। थाने में वीडियो रोकने और मददगारों के साथ ऐसा व्यवहार करने का एक मुख्य कारण यह भी सामने आ रहा है कि एएसआई उस समय न सिर पर टोपी लगाए हुए थे और न वर्दी पर बेल्ट। ऐसे में चर्चा है कि उन्हें उनकी ऐसी हालत में वीडियो वायरल होने का डर था, शायद इसीलिए उन्होंने अपनी गलती छिपाने के लिए जबरन वीडियो बंद करवाया। कहीं न कहीं पुलिस के ऐसे व्यवहार और लापरवाही की वजह से मासूम बच्चा सड़कों पर भटकने को मजबूर हो रहा है।

थानाप्रभारी बस्सी प्रेम सिंह जादौन ने कहा कि रविवार को गृहमंत्री, मुख्यमंत्री निम्बाहेड़ा आए थे, इसलिए ड्यूटी पर था। लेकिन जानकारी में आया कि वीडियो बनाने को लेकर कुछ बहस इनके बीच हुई। एएसआई ने बताया कि मामला कोतवाली थाने का था, इसलिए बच्चे को वहां छोड़ने को बोला। एएसआई ने मुझे भी इसकी जानकारी नहीं दी और वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रकाश में आया।

बस्सी के रामगोपाल ओझा ने बताया कि चाइल्ड लाइन से करण और टीम बच्चे को ढूंढने आए और हमने भी ढूंढा, लेकिन बच्चा नहीं मिला। बाकी तो स्थानीय पुलिस ऐसी स्थिति में बच्चे को हमें सौंप देती है और हम भी चित्तौड़गढ़ भेजते हैं, लेकिन इस घटना में बस्सी पुलिस ने बच्चा नहीं सौंपा और न ही अब वह बच्चा कहीं मिल रहा है।

मामले में सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद पुलिस और चाइल्ड टीम की तलाश जारी है। मासूम के अब तक नहीं मिलने से पूरे घटनाक्रम में थाने की भूमिका और मददगारों के साथ किए गए व्यवहार को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।

Pratahkal Bureau

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