बस्सी में खनन माफिया का दुस्साहस: पुलिस क्वार्टर के पीछे और निजी खेतों में चल रहा अवैध कारोबार
बस्सी में खनन माफिया का आतंक चरम पर है। पुलिस क्वार्टर के पास और किसानों के खेतों में रातों-रात मिट्टी का अवैध खनन किया जा रहा है। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी, प्रशासन की खामोशी से ग्रामीणों में आक्रोश। क्या माफियाओं को संरक्षण प्राप्त है?

बस्सी थाना क्षेत्र में अवैध खनन स्थल, जहां से माफियाओं ने रात के दौरान भारी मात्रा में मिट्टी निकाली है।
राजस्थान सरकार द्वारा अवैध खनन के विरुद्ध चलाए जा रहे सख्त अभियानों के बावजूद बस्सी क्षेत्र में खनन माफियाओं के हौसले बुलंद हैं। स्थिति इतनी चिंताजनक है कि अब माफियाओं ने सार्वजनिक भूमि के साथ-साथ निजी कृषि जमीनों को भी निशाना बनाना शुरू कर दिया है। बस्सी थाना क्षेत्र के अंतर्गत पुलिस क्वार्टर के ठीक पीछे से लेकर शिवसागर तालाब, झूणजी, मोक्षधाम और देव तलाई जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में माफिया बेखौफ होकर जेसीबी मशीनों के माध्यम से मिट्टी और अयस्क का अवैध खनन कर रहे हैं। हैरत की बात यह है कि ये खनन गतिविधियां पुलिस थाना और क्वार्टर के मुख्य मार्ग से सटे होने के बावजूद जिम्मेदारों की नजरों से ओझल हैं, जिससे स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
अवैध खनन का यह सिलसिला तब और गहरा गया जब नेगड़िया खुर्द गांव में एक किसान रतन लाल मीणा की कृषि भूमि को निशाना बनाया गया। माफियाओं ने रात के अंधेरे में जेसीबी और दर्जनों ट्रैक्टरों की मदद से उनके खेत से भारी मात्रा में मिट्टी खोदकर निकाल ली। अगले दिन जब किसान अपने खेत पर पहुंचा, तो वहां पानी भरा था और मिट्टी गायब थी। इस घटना के बाद पीड़ित किसान ने बस्सी थाने में आधा दर्जन लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि खननकर्ताओं ने मिट्टी निकालकर पास ही स्थित एक अन्य खेत में डाल दी है।
विवाद तब और बढ़ गया जब किसान ने अपने खेत से अवैध रूप से मिट्टी निकाले जाने का विरोध किया। पीड़ित के अनुसार, खनन माफियाओं ने उसे जान से मारने की धमकी दी है। अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित किसान ने पुलिस प्रशासन से सुरक्षा प्रदान करने और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है। विश्वसनीय सूत्रों का कहना है कि पूर्व में भी अधिकारियों द्वारा मौके पर पहुंच कर काम रुकवाने का प्रयास किया गया था, परंतु बिना किसी ठोस कार्रवाई के जेसीबी और ट्रैक्टरों को वहां से रवाना कर दिया गया, जिससे माफियाओं का मनोबल और अधिक बढ़ गया है। राजस्व, खनिज और पुलिस विभाग की इस कथित उदासीनता के कारण न केवल सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि आम नागरिकों का जीवन भी असुरक्षित होता जा रहा है। अवैध खनन का यह अनियंत्रित दौर न केवल कानून व्यवस्था को चुनौती दे रहा है, बल्कि क्षेत्र में एक बड़े पारिस्थितिक और सुरक्षा संकट का संकेत भी दे रहा है।

Pratahkal Hub
प्रातःकाल हब, दै.प्रातःकाल की वह समर्पित संपादकीय टीम है, जो सटीक, सामयिक और निष्पक्ष समाचार पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध है। हमारा प्रातःकाल हब राजनीति, समाज, अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय मामलों में सत्यापित रिपोर्टिंग, गहन विश्लेषण और जिम्मेदार पत्रकारिता पर अपना ध्यान केंद्रित करता है।"
