बदलते मौसम, भीषण गर्मी और बढ़ती उमस के बीच बस्सी उपजिला चिकित्सालय में वायरल बुखार और त्वचा संबंधी बीमारियों के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। ओपीडी और डॉक्टर कक्ष के बाहर मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। चिकित्सकों की कमी के कारण पूरा अस्पताल केवल एक डॉक्टर के भरोसे संचालित हो रहा है, जिससे उपचार व्यवस्था प्रभावित हो गई है और मरीजों को घंटों इंतजार करना पड़ रहा है।




अस्पताल में डॉक्टरों की कमी के चलते महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे लंबे समय तक लाइनों में खड़े रहने को मजबूर हैं। इलाज में हो रही देरी से मरीजों में नाराजगी भी देखने को मिल रही है। हजारों की आबादी वाले क्षेत्र का प्रमुख सरकारी अस्पताल आज भी संसाधनों और चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है।

चिकित्सा प्रभारी हरिओम लढ्ढा ने बताया कि सभी मरीजों को व्यवस्थित तरीके से लाइन में लगाकर देखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि तेज धूप, उमस और तापमान में लगातार हो रहे बदलाव के कारण वायरल संक्रमण तेजी से फैल रहा है। अधिकांश मरीज तेज बुखार, सिरदर्द, बदन दर्द और कमजोरी की शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं। वर्तमान में वायरल बुखार के मामलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

डाॅ. लढ्ढा ने लोगों से अचानक तापमान परिवर्तन से बचने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, बाहर के खान-पान से परहेज करने, साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने तथा हल्के सूती कपड़े पहनने की सलाह दी। उन्होंने किसी भी प्रकार के बुखार या त्वचा रोग के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लेने की अपील भी की।

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग से बस्सी उपजिला चिकित्सालय में तत्काल डॉक्टरों की नियुक्ति करने की मांग की है। उनका कहना है कि चिकित्सकों की कमी के कारण क्षेत्र के हजारों लोगों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है।

बस्सी उपजिला चिकित्सालय में करीब 200 से अधिक गांवों के मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। यह चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र का सबसे बड़ा कस्बा होने के बावजूद लंबे समय से महिला चिकित्सक का पद रिक्त है और अस्पताल स्टाफ की भी कमी बनी हुई है। लाइनों में खड़ी महिलाओं ने बताया कि वे छोटे-छोटे बच्चों को पड़ोसियों के भरोसे या घर पर अकेला छोड़कर समय पर जांच कराने अस्पताल पहुंचती हैं, लेकिन घंटों इंतजार के कारण भीषण गर्मी में अस्पताल परिसर में ही समय बिताना पड़ता है। इससे गर्भवती महिलाओं को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

उपजिला चिकित्सालय भवन निर्माण की स्वीकृति मिलने के बावजूद राजनेताओं की खींचतान के कारण निर्माण कार्य लंबे समय से बंद पड़ा है। ऐसे में लगातार बढ़ते मरीजों का दबाव और सीमित चिकित्सकीय संसाधन बस्सी की स्वास्थ्य व्यवस्था के सामने गंभीर चुनौती बन गए हैं।

Pratahkal Bureau

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