भारत को सांस्कृतिक अखंड राष्ट्र बनाना ही हम सभी का लक्ष्य हो : लाभचंद
बड़ीसादड़ी में संघ के युवा कार्यक्रम में लाभचंद ने भारत की सांस्कृतिक अखंडता और कर्तव्य को सच्ची राष्ट्रभक्ति बताते हुए शिक्षकों से संवाद किया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के निमित्त वर्षभर चले हिंदू सम्मेलन, प्रबुद्धजन गोष्ठी और घर-घर संपर्क अभियान के बाद अब संघ की ओर से देशभर में विभिन्न श्रेणियों के युवाओं को केंद्रित कर संगोष्ठी, संवाद, जिज्ञासा-समाधान बैठक सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में निंबाहेड़ा जिले के बड़ीसादड़ी खंड में जयसिंहपुर मंडल मुख्यालय पर युवा आधारित दो कार्यक्रम आयोजित किए गए।
इनमें एक कार्यक्रम विद्यार्थी आधारित था, जबकि दूसरा युवा शिक्षक जिज्ञासा-समाधान कार्यक्रम था। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में संघ के चित्तौड़ विभाग के सह विभाग कार्यवाह लाभचंद ने संबोधित किया। उन्होंने कहा कि भारत आदिकाल से अखंड था, अखंड है और अखंड रहेगा। भौगोलिक बदलाव आया है, लेकिन सांस्कृतिक बदलाव अभी भी वही का वही है। पूरा विश्व भारत की ओर नजर लगाए बैठा है।
लाभचंद ने कहा कि पूरे संसार में भारत ही एकमात्र ऐसा राष्ट्र है, जहां ऋषि परंपरा, वेद परंपरा और ईश्वरों के अवतार हुए हैं। दुनिया को अगर किसी ने सबसे पहले ज्ञान दिखाया, तो वह राष्ट्र भारत ही है। उन्होंने गीत की पंक्ति, "जब दुनिया रो मिनख जिनवार नागौ बूछो डोले रे, तब भारत रा टाबरिया बेदारी ऋचाएं बोले रे", के माध्यम से उपस्थित शिक्षकों से संवाद किया और उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया।
उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ क्या है, इसे जानना आवश्यक है। राष्ट्र के लिए मैं कितना समय दे सकता हूं, इस पर भी विचार होना चाहिए। देशभक्ति केवल सीमा पर जाकर ही नहीं, बल्कि जहां हम मौजूद हैं, वहां रहकर भी निभाई जा सकती है। अपने कर्तव्य स्थल पर समय पर पहुंचना और वहां सौंपे गए कार्य को गुणात्मक दृष्टिकोण से श्रेष्ठ से श्रेष्ठ तरीके से करना ही सच्ची राष्ट्रभक्ति होगी।
कार्यक्रम का शुभारंभ मां भारती की पूजा-अर्चना के साथ राष्ट्रीय गीत से हुआ और समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया। कार्यक्रमों का संचालन सह खंड धर्म जागरण संयोजक भगवत सिंह ने किया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि खंड मुख्य शिक्षा अधिकारी जगदीश धाकड़ रहे, जबकि अध्यक्षता प्रधानाचार्य राधेश्याम चेलावत ने की।
कार्यक्रम में युवाओं और शिक्षकों के साथ संवाद तथा उनकी जिज्ञासाओं के समाधान के माध्यम से राष्ट्र, कर्तव्य और सांस्कृतिक अखंडता से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।

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