बजरंग दल शौर्य प्रशिक्षण वर्ग: चित्तौड़गढ़ शिविर में सामाजिक समरसता पर विमर्श
बजरंग दल के सात दिवसीय शिविर के दूसरे दिन राष्ट्रीय प्रवक्ता देव जी भाई ने युवाओं को धर्मांतरण और करण सिंह ने आपदा प्रबंधन के व्यावहारिक गुर सिखाए।

चित्तौड़गढ़ में आयोजित बजरंग दल के सात दिवसीय शौर्य प्रशिक्षण वर्ग के मंच पर मंचासीन (बाएं से दाएं) प्रान्त सह संयोजक करण सिंह, अखिल भारतीय समरसता प्रमुख देव जी भाई एवं अन्य पदाधिकारी।
चित्तौड़ प्रान्त के तत्वावधान में आयोजित बजरंग दल के सात दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के द्वितीय दिवस पर विभिन्न शारीरिक एवं बौद्धिक सत्रों का गरिमामयी व अनुशासित आयोजन संपन्न हुआ। शिविर में उपस्थित युवाओं ने अदम्य उत्साह एवं कड़े अनुशासन के साथ अपनी सहभागिता निभाई। इस विशेष दिवस की शुरुआत प्रातः कालीन स्मरण, आचार पद्धति, व्यायाम, योग एवं कठिन शारीरिक अभ्यासों के साथ हुई, जिसके पश्चात प्रशिक्षणार्थियों को समता, समूह आधारित गतिविधियों एवं संगठनात्मक कार्य पद्धति का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
चर्चा सत्र के दौरान अखिल भारतीय समरसता प्रमुख एवं राष्ट्रीय प्रवक्ता देव जी भाई ने 'सामाजिक समरसता एवं जीवन व्यवहार' विषय पर युवाओं का मार्ग प्रशस्त किया। उन्होंने गुरु नानक देव, डॉ. भीमराव अंबेडकर एवं महात्मा गांधी के महान उदाहरणों के माध्यम से समाज में समरसता, समानता एवं आपसी सद्भाव के ऐतिहासिक व व्यावहारिक महत्व को गहराई से समझाया। इसके बाद आयोजित मुख्य बौद्धिक सत्र में देव जी भाई ने 'धर्मांतरण' जैसे गंभीर विषय पर विस्तारपूर्वक चर्चा करते हुए इसके सामाजिक एवं सांस्कृतिक दुष्परिणामों पर तीखा प्रकाश डाला। उन्होंने दोटूक शब्दों में कहा कि जनजातीय एवं गरीब क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों द्वारा प्रलोभन, आर्थिक सहायता एवं अन्य अनैतिक माध्यमों का उपयोग कर धर्म परिवर्तन कराने के कुत्सित प्रयास किए जाते हैं, जिससे समाज में विघटन एवं सांस्कृतिक असंतुलन की घातक स्थिति उत्पन्न होती है।
इसके साथ ही उन्होंने तथाकथित 'लव जिहाद' के संवेदनशील विषय पर भी चर्चा की और युवाओं को सामाजिक जागरूकता, निरंतर सतर्कता एवं संस्कारयुक्त जीवनशैली अपनाने का कड़ा संदेश दिया। वर्तमान समय में पाश्चात्य संस्कृति के बढ़ते अंधानुकरण पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने राष्ट्र का आह्वान किया कि भारतीय संस्कृति, परंपराएं एवं संस्कार ही समाज की वास्तविक पहचान हैं, इसलिए युवाओं को अपनी संस्कृति एवं गौरवशाली इतिहास के प्रति जागरूक रहकर सदैव राष्ट्रहित में कार्य करना चाहिए। उन्होंने हिन्दू समाज की घटती संख्या एवं वर्तमान सामाजिक चुनौतियों पर आत्ममंथन करते हुए संपूर्ण समाज को संगठित रहने का संदेश दिया।
शिविर के अगले चरण में प्रान्त सह संयोजक एवं वर्ग प्रमुख करण सिंह ने बजरंग दल के मूल ध्येय वाक्य 'सेवा, सुरक्षा और संस्कार' के अंतर्गत आयोजित आपदा प्रबंधन सत्र में शिक्षार्थियों को विभिन्न प्रकार की आपदाओं से निपटने के उपायों की विस्तृत व तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने दृढ़तापूर्वक बताया कि किसी भी आपदा के समय सबसे महत्वपूर्ण कार्य संयम, सतर्कता और त्वरित प्रबंधन होता है। वैश्विक कोरोना महामारी का जीवंत उदाहरण देते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि किस प्रकार पूरे समाज ने अनुशासन, अटूट सेवाभाव एवं सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन करते हुए कठिन परिस्थितियों का सामना किया था। उन्होंने शिक्षार्थियों को प्राथमिक उपचार, घायलों की त्वरित सहायता, आपातकालीन संपर्क व्यवस्था, स्वैच्छिक रक्तदान, राहत सामग्री वितरण एवं बचाव कार्यों में स्वयंसेवकों की महती भूमिका के बारे में प्रशिक्षित किया। उन्होंने अंत में विशेष बल देते हुए कहा कि आपदा के समय समाज के प्रत्येक व्यक्ति को सेवा भाव के साथ कार्य करते हुए पीड़ितों की सहायता करनी चाहिए।

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