बडोली माधोसिंह स्कूल में छात्राओं ने सहपाठियों को राखी बांध दिया भाई-बहन का संदेश
निम्बाहेडा के बडोली माधोसिंह स्कूल में छात्राओं ने रक्षाबंधन पर सभी जाति समाज के सहपाठी छात्रों को राखी बांधी। पहल से विद्यालय में भाई-बहन जैसा पारिवारिक वातावरण बनाने का संदेश दिया गया।

तस्वीर में बडोली माधोसिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के छात्र और छात्राएं रक्षाबंधन के अवसर पर नजर आ रहे हैं, जहां छात्राओं ने सहपाठियों को राखी बांधी है।
निम्बाहेडा। आज एक ओर जहां विद्यालयों, महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयी परिसरों में पढ़ने वाले युवाओं के मध्य भाई-बहन जैसे रिश्ते खत्म होकर मित्रता के नाम पर कामुकता, अश्लीलता और वासना की गंदी सोच बढ़ती जा रही है, वहीं निकटवर्ती बडोली माधोसिंह स्कूल की छात्राओं ने रक्षाबंधन के पर्व पर भाई-बहन की स्वस्थ पारिवारिक और सुरक्षात्मक परंपरा का उदाहरण प्रस्तुत किया।
राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय बडोली माधोसिंह में छात्राओं ने विद्यालय में पढ़ने वाले सहपाठी छात्रों को राखी बांधकर भाई-बहन जैसा पारिवारिक वातावरण निर्माण करने का प्रयास किया। इसके माध्यम से यह संदेश दिया गया कि साथ पढ़ने वाला या साथ-साथ कार्य करने वाला व्यक्ति केवल मित्र ही हो, यह आवश्यक नहीं है। वह सहपाठी या सहकर्मी किसी महिला का भाई बनकर भी देश की आधी आबादी की सुरक्षा का संकल्प ले सकता है।
विद्यालय के प्रधानाचार्य रवीन्द्र उपाध्याय ने बताया कि रक्षाबंधन पर्व पर कक्षा 11 की छात्रा अंजलि पुष्करणा और पूनम शर्मा के नेतृत्व में विद्यालय की छात्राओं ने स्वतःस्फूर्त होकर यह पहल की। छात्राओं ने बिना किसी जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता रहित भाव से विद्यालय में पढ़ने वाले अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग सहित सभी जाति समाज के छात्रों को राखी बांधी। इस पहल का उद्देश्य विद्यालय में भाई-बहन जैसा पारिवारिक वातावरण बनाना रहा।
इस अवसर पर व्याख्याता गुंजन जैन ने कहा कि विद्यालय की छात्राओं द्वारा छात्रों को राखी बांधने से विद्यालय में होने वाली उच्छृंखलता और अनुशासनहीनता की समस्याओं का कुछ हद तक समाधान होगा। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी प्रतिदिन प्रार्थना सभा में प्रतिज्ञा के नाम पर ‘समस्त भारतीय मेरे भाई बहन हैं’ की शपथ लेते हैं, जिसे रक्षाबंधन के पर्व पर चरितार्थ किया गया है।
इससे पूर्व जयसिंह मीणा आदि शिक्षकों ने विद्यालय में रक्षाबंधन के पर्व को अनिवार्यत: मनाने की आवश्यकता पर अपने विचार रखे।
बडोली माधोसिंह के बड़े बुजुर्गों, जन प्रतिनिधियों और युवाओं ने स्थानीय विद्यालय में रक्षाबंधन पर्व मनाने की पहल को प्रशंसनीय और अनुकरणीय उदाहरण बताया। विद्यालय की छात्राओं की इस पहल ने भाई-बहन के पारिवारिक और सुरक्षात्मक रिश्ते की स्वस्थ परंपरा को विद्यालय परिसर में व्यवहारिक रूप से सामने रखा।

