बड़ी सादड़ी में विशाल सत्संग समारोह आयोजित, रेणुका बहन ने सत्य ज्ञान, संत और सद्गुरु की महिमा बताई
बड़ी सादड़ी के रेगर समाज पंचायती भवन में आयोजित विशाल सत्संग समारोह में सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। रेणुका बहन ने सत्य ज्ञान, संत और सद्गुरु की महिमा पर विस्तार से विचार रखे।

तस्वीर में बड़ी सादड़ी के रेगर समाज पंचायती भवन में आयोजित सत्संग समारोह के दौरान भजन प्रस्तुत करते कलाकार और बैठे हुए श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
बड़ी सादड़ी के रेगर समाज पंचायती भवन में विशाल सत्संग समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के क्षेत्रों तथा अन्य शहरों से सैकड़ों संत महापुरुष, माताएं, युवा और बच्चे उत्साहपूर्वक शामिल हुए। बारिश का दौर जारी रहने के बावजूद श्रद्धालु पूरे उत्साह के साथ सत्संग सुनने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे।
सत्संग की शुरुआत ब्रह्म ज्ञानी संतों के भजनों से हुई, जिनकी प्रस्तुति से पूरा परिसर धन निरंकार जी की गूंज और भक्ति भाव से सराबोर हो गया। विभिन्न संतों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए सत्य, ज्ञान, प्रेम, मानवता और निरंकार की महिमा का विस्तार से वर्णन किया।
इस अवसर पर निरंकारी ज्ञान प्रचारक रेणुका बहन, उदयपुर ने अपने संबोधन में कहा कि आज हम सभी यहां मिलकर सत्संग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि पहले हम भजन-कीर्तन करते थे, रात्रि जागरण करते थे और राती जगा भी करते थे, लेकिन सत्संग नहीं करते थे क्योंकि हमें सत्य का पता ही नहीं था। उन्होंने कहा कि जैसे हमारे परिवार वाले या हमारे पूर्वज करते थे और समाज ने हमें जो सिखाया, उसी के अनुसार हम पूजा-पाठ करते रहे, लेकिन सत्संग नहीं करते थे क्योंकि हमें सत्य का ज्ञान नहीं था।
रेणुका बहन ने कहा कि संत, सद्गुरु और परमात्मा तीनों रूप से एक समान हैं। संत मिलता है सद्गुरु और सद्गुरु मिलता है राम। जब ब्रह्म ज्ञानी संत का संग मिलता है तो वह हमारी आत्मा को इस रमे हुए राम से मिला देते हैं। उन्होंने कहा कि सत्य को जानकर, मानकर फिर भक्ति करनी होती है। संत बड़े परमार्थी होते हैं, शीतल होते हैं और शीतलता देते हैं तथा राम नाम का रंग प्रदान कर देते हैं। उन्होंने कहा कि संसार में संत ही ऐसे होते हैं जो एक-दूसरे का भला चाहते हैं। वर्तमान में सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ब्रह्म ज्ञान देकर सत्संग, सेवा और सिमरन से जोड़कर हमारा यह लोक एवं परलोक सुहैला कर रहे हैं।
कार्यक्रम में गायत्री परिवार से पधारे श्री रमेश चंद्र मोहिल एवं श्रीमती चंदा देवी तथा अमृतलाल जाटोलिया और लक्ष्मी देवी ने निरंकारी प्रचारक रेणुका का शाल एवं श्रीफल भेंट कर स्वागत किया।
आयोजकों राधे श्याम, सीता, मनीष, कुसुम, प्रकाश चंद्र, ममता, दर्शील, जियांस, दरिया कुंवर सहित अन्य ने माला एवं दुपट्टा पहनाकर अतिथियों का स्वागत किया तथा आभार व्यक्त किया।
सत्संग समारोह में बोहेड़ा, बांसी, कानोड़, भिंडर, रनिया, उदयपुर, चित्तौड़गढ़, मंगलवाडं, निकुम, भानुजा, निंबाहेड़ा, नीमच, उछैड़, मनासा सहित अनेक गांवों और शहरों से निरंकारी संत एवं अन्य श्रद्धालुओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का संचालन भेरूलाल ने किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति और ब्रह्म ज्ञान, सत्संग, सेवा एवं सिमरन का संदेश इस आयोजन की प्रमुख विशेषता रहा।

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