असम की लोक विरासत ने चित्तौड़गढ़ में रचा सांस्कृतिक इतिहास, राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव में लोक कलाकारों की भावविभोर कर देने वाली प्रस्तुति
चित्तौड़गढ़ में राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव के दौरान असम के लोक कलाकारों ने बिहू, बोडो, हाजोंग और तीवा नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। ग्रुप लीडर जीना कुमारी के नेतृत्व में कलाकार दल ने असम की समृद्ध लोक संस्कृति, परंपराओं और जनजातीय जीवनशैली को प्रभावशाली ढंग से मंच पर सजीव किया।

चित्तौड़गढ़। राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव के अंतर्गत मंगलवार देर रात्रि आयोजित सांस्कृतिक संध्या चित्तौड़गढ़ के लिए अविस्मरणीय बन गई, जब असम राज्य से आए लोक कलाकारों ने अपनी सजीव प्रस्तुतियों से मंच पर लोक संस्कृति का जीवंत संसार रच दिया। दर्शकों से खचाखच भरे पांडाल में जैसे ही असम की लोक लय गूंजी, पूरा वातावरण उत्सव, परंपरा और सांस्कृतिक चेतना से सराबोर हो उठा।
असम सरकार के सांस्कृतिक निदेशालय के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में ग्रुप लीडर जीना कुमारी के नेतृत्व में आए कलाकार दल ने असम की समृद्ध और बहुरंगी लोक परंपराओं को प्रभावशाली ढंग से मंच पर प्रस्तुत किया। कलाकारों ने बिहू नृत्य की उल्लासपूर्ण गति, बोडो नृत्य की सामूहिक ऊर्जा, हाजोंग नृत्य की गरिमामय अभिव्यक्ति और तीवा नृत्य की पारंपरिक भाव-भंगिमाओं के माध्यम से असम के जनजातीय एवं लोक जीवन की आत्मा को दर्शकों के सामने सजीव कर दिया।
इन प्रस्तुतियों के माध्यम से कृषि आधारित जीवन, प्रकृति के प्रति आस्था, ऋतु परिवर्तन, सामाजिक समरसता और लोक विश्वासों का सुंदर समन्वय देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा, लोक वाद्य यंत्रों की मधुर ध्वनि और ताल-लय के सधे हुए संयोजन ने नृत्य-नाटिकाओं को और अधिक प्रभावशाली बना दिया, जिससे दर्शक असम की सांस्कृतिक विरासत से गहराई से जुड़ते चले गए।
इस कलाकार दल में ग्रुप लीडर जीना कुमारी के साथ भाबाज्योति दास, रिया तुमुंग, रानी रामचियारी, अन्वेषा कश्यप, राजनंदिनी बोरकाकोटी, अक्षय बरमन, प्रांजल कचारी, धनज्योति सहारिया एवं राजिब राभा शामिल रहे, जिनकी सामूहिक प्रस्तुति ने कार्यक्रम को विशेष ऊंचाई प्रदान की।
कार्यक्रम के समापन पर कलाकारों को एडीएम प्रशासन प्रभा गौतम, एसडीएम बीनू देवल, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार दशोरा, रघु शर्मा, हर्षवर्धन सिंह रूद, सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रभारी दल के संजय कोदली, अनुराधा आर्य, रेखा शर्मा सहित अन्य अतिथियों द्वारा सम्मानित किया गया। यह सांस्कृतिक संध्या न केवल राष्ट्रीय स्वदेशी महोत्सव की गरिमा को बढ़ाने वाली सिद्ध हुई, बल्कि भारत की विविध लोक संस्कृतियों के आपसी संवाद और एकता का सशक्त संदेश भी देकर गई।
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