निम्बाहेड़ा में मानवता की मिसाल: कड़कड़ाती ठंड में जैन जागृति सेंटर ने फैलाया सेवा का उजाला
निम्बाहेड़ा में मकर संक्रांति पर जैन जागृति सेंटर ने पेश की मानवता की मिसाल। भीषण ठंड के बीच 100 निर्धन परिवारों और गौशाला श्रमिकों को कंबल वितरित कर सेवा अभियान का किया शुभारंभ। अशोक नवलखा, अतुल सेठिया सहित पूरी टीम ने समाज के कमजोर वर्गों की मदद का संकल्प दोहराया। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

निम्बाहेड़ा। हाड़ कंपा देने वाली सर्दी और शीत लहर के बीच जब जनजीवन ठिठुर रहा है, तब निम्बाहेड़ा के जैन जागृति सेंटर ने मकर संक्रांति के पावन अवसर पर आत्मीयता की गर्माहट बिखेर कर मानवता का अनुपम उदाहरण पेश किया है। पर्व की सार्थकता को चरितार्थ करते हुए संस्था द्वारा निर्धन एवं असहाय परिवारों के लिए '100 ऊनी कंबल वितरण अभियान' का शंखनाद किया गया, जिसने न केवल जरूरतमंदों को सर्दी से राहत दी, बल्कि समाज में सेवा और करुणा का एक सशक्त संदेश भी प्रवाहित किया है।
इस पुनीत सेवा प्रकल्प की आधारशिला जे.जे.सी. सेंट्रल बोर्ड, मनीष नवलखा, हेमंत नवलखा और क्षेत्र के उदारमना दानदाताओं के सामूहिक सहयोग से रखी गई। बुधवार की स्याह और बर्फीली रात में जब पारा न्यूनतम स्तर पर था, तब जैन जागृति सेंटर के पदाधिकारी नगर की प्रमुख गौशालाओं में पहुंचे। अभियान के प्रथम चरण में श्री सांवरिया गौशाला, श्रीराम गौशाला एवं श्री जैन दिवाकर कमल गौशाला में अपना पसीना बहाने वाले श्रमिक परिवारों को ऊनी कंबल भेंट किए गए। कड़कड़ाती ठंड के बीच अचानक मिली इस सहायता ने उन श्रमिकों के चेहरों पर जो संतोष और मुस्कान बिखेरी, वह इस अभियान की सफलता का जीवंत प्रमाण बनी।
सेवा के इस महायज्ञ में जैन जागृति सेंटर के अध्यक्ष अशोक नवलखा, सचिव अतुल सेठिया और सलाहकार सिद्धराज संघवी ने अपनी गरिमामयी उपस्थिति दर्ज कराई। उनके साथ कार्यकारिणी सदस्य विरेन्द्र मारू, आशीष बोडाना एवं दीपक सगरावत ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। इन पदाधिकारियों ने न केवल कंबलों का वितरण किया, बल्कि प्रत्येक श्रमिक परिवार से व्यक्तिगत संवाद कर उनका कुशलक्षेम जाना, जिससे सेवा के इस कार्य में संवेदनशीलता का पुट भी समाहित हो गया।
इस अवसर पर संस्था के नेतृत्व ने मकर संक्रांति के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि दान और करुणा ही इस पर्व की वास्तविक आत्मा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति की मदद करना ही सच्ची ईश्वर सेवा है। दानदाताओं के प्रति कृतज्ञता ज्ञापित करते हुए पदाधिकारियों ने संकल्प दोहराया कि संसाधनों के अभाव में किसी भी जरूरतमंद को कष्ट नहीं होने दिया जाएगा। यह अभियान मात्र एक वितरण कार्यक्रम नहीं, बल्कि भविष्य में निरंतर चलने वाले जनकल्याणकारी कार्यों की एक कड़ी है, जिसने निम्बाहेड़ा की धरा पर परोपकार की एक नई इबारत लिख दी है।

Pratahkal Bureau
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