निम्बाहेड़ा में मानवता की मिसाल: दो दानवीरों के नेत्रदान से चार जीवन हुए रोशन
निम्बाहेड़ा में लायंस क्लब के प्रयासों से दिवंगत पारस सिसोदिया और कंचन बाई के परिजनों ने नेत्रदान कर मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। डॉ. जे.एम. जैन के नेतृत्व में प्राप्त इन नेत्रों से चार नेत्रहीनों को नई रोशनी मिलेगी। अब तक 900 से अधिक लोगों को रोशन कर चुके इस क्लब की यह पहल समाज के लिए प्रेरणादायक है। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

निम्बाहेड़ा। मानवता की सेवा और परोपकार की प्रतिमूर्ति बने चित्तौड़गढ़ जिले के निम्बाहेड़ा कस्बे में सोमवार का दिन चार परिवारों के लिए नई उम्मीदों की किरण लेकर आया। राष्ट्रीय अंधत्व निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत लायंस क्लब निम्बाहेड़ा के समर्पित प्रयासों से दो दिवंगत पुण्यात्माओं के नेत्रदान संपन्न हुए, जिनके माध्यम से चार दृष्टिहीन व्यक्तियों के जीवन के अंधकार को मिटाकर उन्हें नई रोशनी प्रदान की जाएगी। यह भावुक क्षण न केवल शोक संतप्त परिवारों के साहस को दर्शाता है, बल्कि समाज के प्रति उनकी अटूट जिम्मेदारी का भी प्रतीक है।
लायंस क्लब के अध्यक्ष नानालाल भूतड़ा ने इस पुनीत कार्य की जानकारी देते हुए बताया कि आई डोनेशन चेयरमैन डॉ. जे.एम. जैन ने पूरी संवेदनशीलता के साथ शल्य क्रिया संपन्न कर नेत्रों को सुरक्षित प्राप्त किया। इन नेत्रों को तत्काल प्रत्यारोपण के लिए नीमच स्थित प्रसिद्ध गोमाबाई नेत्रालय भिजवा दिया गया है, जहाँ प्रतीक्षा सूची में शामिल चार व्यक्तियों को यह अनमोल उपहार भेंट किया जाएगा।
नेत्रदान की इस प्रेरक गाथा के पीछे लायंस सदस्य अशोक मारू एवं मनोहरलाल वासवानी की सक्रिय प्रेरणा रही। उनके मार्गदर्शन में सोहनघाटी निवासी 66 वर्षीय पारस सिसोदिया पुत्र रतनलाल सिसोदिया के निधन के पश्चात उनके परिजनों ने सायं 5 बजे नेत्रदान का निर्णय लिया। इसके कुछ ही समय बाद, सायं 5:45 बजे 92 वर्षीया कंचन बाई पत्नी स्वर्गीय सुखवाल पिछोलिया के पार्थिव शरीर से उनके परिजनों ने नेत्रदान करवाकर एक अनुकरणीय उदाहरण पेश किया। दुःख की इस घड़ी में सोहनलाल सिसोदिया सहित अशोक कुमार, सुरेश, अनिल एवं ललित जैन ने अपने प्रियजनों की विदाई को यादगार बनाते हुए इस महान कार्य में सहयोग किया।
लायंस क्लब निम्बाहेड़ा का यह सफर उपलब्धियों से भरा रहा है। क्लब अब तक कुल 455 जोड़ी नेत्रदान प्राप्त कर चुका है, जिसके माध्यम से 900 से भी अधिक व्यक्तियों की दुनिया को रोशन किया गया है। सोमवार को आयोजित इस मुहिम को सफल बनाने में लायंस सदस्य एवं पदाधिकारी अशोक जैन, अरविंद मूंदड़ा, श्याम सुंदर माहेश्वरी, कैलाश लड्ढा, विक्रमादित्य खेरोदिया, अरविंद खंडेलवाल, विनोद माहेश्वरी, कुंजबिहारी अग्रवाल, राजकुमार रायपुरिया और सुनील डूंगरवाल के साथ कंपाउंडर आशाराम सैन का विशेष और सराहनीय योगदान रहा। निम्बाहेड़ा की यह पहल साबित करती है कि मृत्यु के पश्चात भी इंसान दूसरों के जीवन का उजाला बन सकता है।

Pratahkal Bureau
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