चित्तौड़गढ़ में कड़कड़ाती ठंड के बीच रैन बसेरों पर 'सर्जिकल स्ट्राइक', व्यवस्थाएं देख सचिव ने दिए सख्त निर्देश
चित्तौड़गढ़ में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव सुनील कुमार गोयल ने रैन बसेरों का औचक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मानसिंह चूंडावत के निर्देशानुसार हुई इस कार्रवाई में ठंड से बचाव हेतु हीटर, चिकित्सा सुविधा और सुरक्षा के कड़े निर्देश दिए गए ताकि जरूरतमंदों को सुरक्षित आश्रय मिल सके। जानिए पूरी रिपोर्ट।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान में सर्दी के तीखे तेवरों के बीच जब आम जनजीवन ठिठुर रहा है, तब जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने बेसहारा और जरूरतमंदों की सुध लेने के लिए आधी रात को मोर्चा संभाला। राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष मानसिंह चूंडावत के कड़े निर्देशों के बाद, प्राधिकरण के सचिव सुनील कुमार गोयल अचानक शहर की सड़कों पर निकले। यह कोई सामान्य दौरा नहीं, बल्कि उन रैन बसेरों का औचक निरीक्षण था जहाँ समाज का सबसे अंतिम पंक्ति का व्यक्ति शरण लेता है। इस औचक कार्रवाई ने न केवल प्रशासनिक अमले में खलबली मचा दी, बल्कि व्यवस्थाओं की जमीनी हकीकत को भी उजागर किया।
निरीक्षण की इस कड़ी में सचिव सुनील कुमार गोयल सबसे पहले रोडवेज बस स्टैंड स्थित रैन बसेरे पहुंचे। वहां की व्यवस्थाओं को बारीकी से परखने के बाद उनका अगला पड़ाव रेलवे स्टेशन स्थित रैन बसेरा रहा। इन आश्रय स्थलों पर सचिव ने स्वयं कंबल की गर्माहट, चादरों की स्वच्छता और पीने के पानी की उपलब्धता की जांच की। संतोषजनक बात यह रही कि प्राथमिक जांच में स्वच्छता और ठहरने की बुनियादी व्यवस्थाएं दुरुस्त पाई गईं, लेकिन सचिव गोयल का विजन मात्र बुनियादी सुविधाओं तक सीमित नहीं था।
अधिकारियों और कर्मचारियों को मौके पर ही कड़े निर्देश देते हुए सचिव गोयल ने स्पष्ट किया कि केवल छत देना काफी नहीं है, बल्कि ठिठुरते लोगों को सुरक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी देना भी प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने निर्देश दिए कि रैन बसेरों में रुकने वाले हर जरूरतमंद व्यक्ति के लिए नियमित चिकित्सा जांच की व्यवस्था की जाए और मौके पर फर्स्ट एड किट अनिवार्य रूप से उपलब्ध हो। सुरक्षा के मानकों पर कोई समझौता न करते हुए उन्होंने अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंगुइशर) लगाने और भीषण ठंड से राहत दिलाने के लिए हीटरों की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।
इस निरीक्षण का सबसे महत्वपूर्ण पहलू सतत निगरानी और मानवीय दृष्टिकोण रहा। सचिव ने प्रकाश व्यवस्था और नियमित साफ-सफाई पर विशेष जोर देते हुए कहा कि शीत ऋतु के दौरान किसी भी व्यक्ति को सुविधा के अभाव में खुले आसमान के नीचे सोने को मजबूर न होना पड़े। मानसिंह चूंडावत के मार्गदर्शन में हुई इस कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि चित्तौड़गढ़ के रैन बसेरे केवल ईंट-पत्थर का ढांचा न रहकर, बेसहारा लोगों के लिए एक सुरक्षित और सम्मानजनक आशियाना साबित हों। इस पहल ने न्यायपालिका की उस सक्रियता को भी रेखांकित किया है, जहां वह आम आदमी के अधिकारों और उनकी मूलभूत आवश्यकताओं के प्रति सजग खड़ी नजर आती है।

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