PWD ने किसान के खेत में छोड़ी नाली, ग्रामीणों में रोष
शनि महाराज रोड पर बिना सूचना कृषि भूमि की तरफ मोड़ा नाली का रुख, पीड़ित ने मुख्यमंत्री और जिला कलेक्टर से की शिकायत।

तस्वीर में शनि महाराज रोड के किनारे अधूरी खोदी गई नाली और उसके पास जमा मिट्टी व पत्थर दिखाई दे रहे हैं।
नगर पालिका क्षेत्र के शनि महाराज रोड पर लोक निर्माण विभाग (PWD) द्वारा सड़क किनारे बनाई जा रही नाली को आगे तक ले जाने के बजाय एक किसान की निजी कृषि भूमि में छोड़ दिए जाने का मामला सामने आया है। पीड़ित भूमि मालिक ने पीडब्ल्यूडी अधिकारियों और ठेकेदार पर मिलीभगत कर खेत में अवैध रूप से नाली निर्माण कराने की शिकायत की है। मामले को लेकर स्थानीय किसानों में भी रोष व्याप्त है।
मामला शनि महाराज रोड स्थित खेजड़ा भेरुजी देवरे के सामने का है। शिकायतकर्ता के अनुसार उनकी कृषि भूमि इसी स्थान पर स्थित है। हाल ही में पीडब्ल्यूडी द्वारा सड़क किनारे नाली निर्माण का कार्य शुरू किया गया, लेकिन विभाग और ठेकेदार ने बिना किसी पूर्व सूचना या नोटिस के अनाधिकृत रूप से नाली का रुख उनकी निजी कृषि भूमि की ओर मोड़कर वहीं छोड़ दिया।
पीड़ित पक्ष का आरोप है कि इस नाली के माध्यम से आकोला नगर पालिका क्षेत्र की बस्ती का गंदा पानी, कचरा और बरसात का पानी सीधे उनके खेत में पहुंचेगा। उनका कहना है कि नियमानुसार नाली का निर्माण आगे तक किया जाना चाहिए था, ताकि पानी की सुरक्षित निकासी हो सके। इसके विपरीत पूरी नाली का रुख खेत की ओर मोड़ दिया गया, जिससे भविष्य में बस्ती का समस्त गंदा पानी और कचरा कृषि भूमि में जमा होगा। इससे फसलों को नुकसान पहुंचेगा और भूमि के स्थायी रूप से दलदल बनने की आशंका है।
पीड़ित भूमि मालिक राजकुमार जैन ने कहा कि बिना किसी सूचना के किसी की निजी भूमि पर इस प्रकार नाली लाकर छोड़ देना पूरी तरह गैर-कानूनी और अनाधिकृत है। उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार ने मिलीभगत कर पूर्व में भी उनके खेत का हिस्सा काट लिया था और अब पूरी बस्ती का गंदा पानी उनके खेत में डालने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे इस मामले में चुप नहीं बैठेंगे।
मामले को लेकर पीड़ित पक्ष ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, सांसद, स्थानीय विधायक तथा जिला कलेक्टर को पत्र लिखकर हस्तक्षेप और उचित कार्रवाई की मांग की है। साथ ही दोषपूर्ण एवं अवैध नाली निर्माण को तत्काल रोकने, नाली को आगे तक बनाकर पानी की समुचित निकासी सुनिश्चित करने तथा पूर्व में खेत से काटी गई भूमि का उचित समाधान करने की मांग भी की गई है।
ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने इस कथित मिलीभगत और अनाधिकृत निर्माण पर शीघ्र संज्ञान नहीं लिया तो वे उच्चाधिकारियों का दरवाजा खटखटाते हुए कानूनी कार्रवाई का सहारा लेंगे। यह मामला अब निजी कृषि भूमि, जल निकासी व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण विवाद बनता जा रहा है।

Pratahkal Bureau
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